उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैराना और नूरपुर उपचुनाव में हार और सरकार के भीतर सहयोगियों के तेवर को देखते हुए योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्यवाही तेज कर दी है। सीएम योगी ने गुरुवार को सख्ती दिखाते हुए राज्य के दो डीएम को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने गोंडा के डीएम जेबी सिंह, फतेहपुर के डीएम प्रशांत कुमार को हटा दिया है।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को गोंडा के डीएम जेबी सिंह को खाद्यान्न की कालाबाज़ारी न रोक पाने के लिए उन्हें सजा देते हुए पद से हटा दिया है। उनके जिले में खुले बाज़ार में सरकारी राशन बेचे जाने की शिकायत मिली थी। इस पर जांच हुई। जांच में शिकायत सही मिली। लखीमपुर रवाना होने से पहले योगी आदित्यनाथ ने जेबी सिंह को सस्पेंड कर दिया। डीएम समेत कई अधिकारियों को निलंबित किये जाने और कई के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के एक्शन से जिले में खलबली मच गई है। दस बजे के बाद जैसे ही राजधानी से डीएम के निलंबन की खबर यहां पहुंची अधिकारी तो क्या लोग भी सकते में रह गये। डीएम का निलंबन ऐसे वक्त हुआ है जब उनको यहां एक साल पूरा होने में सिर्फ चौदह दिन रह गए थे। इस बड़ी कार्रवाई के बाद डीएम ऑफिस और बंगले दोनों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया। खास बात यह रही कि डीएम आफिस भी नहीं खुला दिखाई दिया।
बीते दिनों तरबगंज भाजपा विधायक प्रेम नारायण पांडेय ने अफसरों को लेकर वजीरगंज में छापेमारी में भारी मात्रा में अवैध खाद्यान्न पकड़ा था। तभी से बड़ी कार्रवाई की चर्चा शुरू हो गई थी। हालांकि डीएम निलम्बित होंगे इसे लेकर कोई कयास नहीं लगाया जा रहा था। 22 मई 2017 को बतौर डीएम की कुर्सी संभालने वाले जेबी सिंह खनन मामले को लेकर पहले ही शासन के टार्गेट पर आ चुके थे। इधर खाद्यान्न घोटाले ने उन्हें निलंबन की बड़ी कार्रवाई झेलने को मजबूर कर दिया।
इस कार्रवाई के बाद सबसे पहले डीएम आवास का जायजा लिया गया। वहां शिविर में कुछ कर्मचारी बैठे दिखाई दिए। फाइलों को किनारे कर गुमसुम बैठे कर्मचारियों ने किसी तरह का कोई जवाब नहीं दिया। बस इतना बताया कि साहब अंदर है, और किसी से मिलने को मना किया है। जानकारी के मुताबिक साहब रोज दस बजे ही ऑफिस चले जाते थे, आज अभी तक नहीं गये। वहीं कार्यालय पर भी सन्नाटा दिखाई दिया। जिस कमरे में डीएम बैठते हैं वहां ताला लगा हुआ है। जनता दर्शन में आये फरियादी भी वापस लौटने को मजबूर हुए। इस बड़ी कार्रवाई के बाद कोई भी अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। अफसर इस कदर सकते में हैं कि मीडिया को देखते ही बोल उठे कि भाईसाहब हम लोगों को कुछ नहीं पता कैसे क्या हुआ। हालांकि इस बड़ी कार्रवाई का खौफ अफसरों के चेहरों पर साफ नजर आ रहा है।
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