पीडीपी से समर्थन वापस लेने के बाद आज बीजेपी जम्मू-कश्मीर में एक बड़ी रैली का आयोजन करेगी। गठबंधन वापस लेने के बाद शाह का यह जम्मू कश्मीर का पहला दौरा होगा। राज्य में फिलहाल राज्यपाल शासन लागू है। इस दौरे को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं में उत्साह है। अमित शाह का यह दौरा बीजेपी के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि वाले दिन है। डॉ श्यामा प्रसाद ने जम्मू कश्मीर के भारत में पूर्ण विलय के लिए श्रीनगर की एक जेल में प्राणों की आहूति दी थी।
अमित शाह अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों का जायजा लेंगे। इसके साथ ही ब्राहमण सभा परेड रोड के सामने एक विशाल जनसभा का आयोजन होगा, जिसे शाह संबोधित करेगे। अमित शाह अगले चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए पार्टी की चुनाव समिति की बैठक की अध्यक्षता करेगे। अब उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर अमित शाह का जम्मू आने का मतलब साफ़ है कि अब बीजेपी अपने मुद्दों पर वापस लौटेगी। बीजेपी यह मान रही है कि अमित शाह का यह दौरा ना केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकेगी बल्कि इसी दौरे के साथ राज्य में लोकसभा और राज्य के चुनावों की तैयारी भी शुरू हो जाएगी।
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 में कोलकाता में हुआ था। वह भारतीय जनसंघ (अब बीजेपी) के संस्थापक थे। इन्होंने साल 1929 में राजनीति की शुरूआत की थी। वह बंगाल विधान परिषद में चुने गए थे। श्यामा प्रसाद मुखर्जी साल 1947 में पंडित जवाहर लाल नेहरु की कैबिनेट में भी शामिल हुए थे। हालाकिं तीन साल बाद साल 1950 में उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद उन्होंने साल 1951 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोलवलकर के कहने पर भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी। साल 1952 के चुनाव में जनसंघ के तीन सांसद चुने गए। श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की अखंडता और कश्मीर का भारत में विलय के समर्थक थे। मुखर्जी जम्मू-कश्मीर में धार 370 हटाने का विरोध करते रहे।
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