उत्तर प्रदेश में बागपत से 35 किलोमीटर दूर बदरखा गांव में दो अक्टूबर को अख़्तर अली और उनके तीन बेटों के साथ एक बहू और अन्य आठ लोगों ने अपना धर्म बदल लिया और हिन्दू बन गए. 64 वर्षीया अख़्तर अली अब धर्म सिंह बन गए हैं वहीं उनके बेटे दिलशाद का कहना है कि अब वो दिलेर सिंह बन गए हैं. दिलशाद की पत्नी मनसु का भी कहना है कि वो अब मंजू हैं.
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार परिवार में सबको ये धर्म परिवर्तन भाया नहीं है। उनके बेटे नौशाद जो अब नरेंद्र बन गए हैं उनकी पत्नी रुक़ैया कहती हैं कि उन्हें अपने ही मज़हब में रहना है .बदरखा गांव में इस परिवार का कोई घर नहीं है. ये गांव के ही जसबीर सिंह चौधरी के घर में पिछले दो महीनों से रह रहे हैं। ‘युवा हिन्दू वाहिनी भारत’ के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सोकेंद्र खोखर इसी गांव के हैं और उन्होंने ही ये घर दिलवाया है। युवा हिन्दू वाहिनी के सोकेंद्र खोखर और योगेंद्र तोमर ने ही इस परिवार को बदरखा गांव के एक मंदिर में मुसलमान से हिन्दू बनाया था।
इस परिवार का कहना है कि 29 सितंबर को सोकेंद्र खोखर से मिलने गए थे. जहाँ सोकेन्द्र ने कहा कि वो उनके भाई गुलशन की मौत में पुलिस और सरकार से मदद कराएंगे और वहीँ पर धर्म परिवर्तन की बात हुई थी। अख़्तर अली का परिवार इससे पहले बागपत शहर के पास खूबीपुर निवाडा गांव में रहता था। इसी साल जुलाई महीने में इनके बेटे गुलशन का शव संदिग्ध हालत में लटका हुआ मिला था.
बागपत के एसपी शैलेश पांडे का कहना है कि ”इस परिवार ने पुलिस को सूचित किए बिना ख़ुद ही शव को उतारा और नहलाकर दफ़नाने चल दिया। इन्होंने पुलिस को बिना बुलाए शव क्यों उतारा? इन्होंने जो एफ़आईआर लिखवाई है उसमें भी यही कहा है कि उनके बेटे का शव लटका हुआ मिला. इसकी जांच चल रही है और जल्द ही सब कुछ साफ़ हो जाएगा।”
अख़्तर अली जो अब धरम सिंह बन गए हैं, उनका कहना है कि 22 साल के गुलशन की हत्या हुइ है। उनका कहना है कि मुश्किल वक़्त में उनके धर्म के लोगों ने भी इनका साथ नहीं दिया था इसलिए हिन्दू धर्म अपनाने का फ़ैसला किया है। इन सबमें दुखी करने वाली बात यह है कि क्या भारत जैसे देश में जिसे विविधताओ का देश कहते है वहाँ इन्साफ के लिए धर्म बदलना पड़ रहा है। वहाँ के बाकि मुसलमान कुछ भी कहने से डर रहे हैं। उम्मीद है कि पुलिस जाँच करेगी और उनके बेटे की मौत का सही कारण पता चलेगा।
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