अजय चौधरी

कार्यकर्ताओं को छोड़ दें तो इस बार तीन तरह का वोटर नजर आ रहा है। एक वोटर चीख रहा है, लहर बता रहा है। एक वोटर चुप है। वो कैमरे के सामने नहीं आना चाहता। न कुछ बोलना चाहता। वो किसी को नाराज नहीं करना चाहता न किसी दिक्कत में फंसना चाहता। पर अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहता है।
तीसरा वोटर कैमरे के सामने आने पर मोदी-मोदी बोलता है और चला जाता है। इससे ज्यादा कुछ नहीं। जो दो नारे लगा वापस चला जाए उसकी बाईट स्क्रीन पर भी नहीं आ सकती। वो बस कैमरे को नाराज नहीं करना चाहता था। खासकर व्यापारी वर्ग कैमरे के सामने आने से कतरा रहा है। ग्रामीण कैमरे के सामने आ तो रहे हैं लेकिन वो भी गोलमोल जवाब दे रहे हैं। जो खुलकर बोल रहे हैं उनमें से अधिकतर कार्यकर्ता हैं।
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