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Dastak India > Home > ऑटो > Uber फोन की कंपनी और बैटरी के आधार पर एक ही डेस्टिनेशन के लिए लेता है अलग किराया? शख्स ने किया चौकाने..
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Uber फोन की कंपनी और बैटरी के आधार पर एक ही डेस्टिनेशन के लिए लेता है अलग किराया? शख्स ने किया चौकाने..

Dastak Web Team
Last updated: January 19, 2025 7:24 pm
Dastak Web Team
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Uber Pricing
Photo Source - Google
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Uber Pricing: दिल्ली के एक उद्यमी ने Uber के प्राइज़िंग सिस्टम पर एक इंंटरस्टिंग एक्सपेरिमेंट किया है, जिसने ऑनलाइन यात्रा सेवाओं में पारदर्शिता और नैतिकता पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। रिषभ सिंह, जो कि engineerHUB – एक ऑनलाइन प्लेसमेंट प्लेटफॉर्म के संस्थापक हैं, ने अपने अनुभव को X पर एक सीरीज़ पोस्ट्स के जरिए शेयर किया। इस प्रयोग में उन्होंने Uber के किराया स्ट्रक्चर का एनालिसिस किया, यह चेक करते हुए, कि क्या प्लेटफॉर्म और बैटरी लेवल जैसे फैक्टर यात्रा की कीमतों को प्रभावित करते हैं।

एक्सपेरिमेंट की शुरुआत(Uber Pricing)-

रिषभ सिंह ने अपने एक्सपेरिमेंट की शुरुआत “The Curious Case of Uber Fare Discrepancies: Platform and Battery Impact” टाइटल के साथ की। उन्होंने एक ही Uber अकाउंट में लॉगिन किए गए दो एंड्रॉइड और दो आईफोन डिवाइसों का इस्तेमाल करके यात्रा की कीमतों में अंतर देखा। उन्होंने पाया, कि एक ही यात्रा एक ही स्थान और एक ही समय पर की गई हो, फिर भी किराया अलग-अलग था, जो कई सवाल खड़े करता है।

एक जगह का अलग-अलग किराया(Uber Pricing)-

सिंह ने सबसे पहले ध्यान दिया, कि Android और iOS डिवाइसों के बीच किराये में अंतर था। कुछ विशेष छूटें जैसे “13% ऑफ” या “50% ऑफ” सिर्फ एक डिवाइस पर दिखाई देती थीं, जबकि दूसरे डिवाइस पर वे उपलब्ध नहीं थीं। सिंह ने कहा, “यह संकेत करता है कि Uber का मूल्य निर्धारण एल्गोरिथ्म शायद डिवाइस के आधार पर भिन्न हो सकता है।”

डायनेमिक प्राइसिंग(Uber Pricing)-

सिंह ने इसके बाद “डायनेमिक प्राइसिंग” के संभावित प्रभावों पर चर्चा की, जिसमें उन्होंने कहा, “यह संकेत करता है, कि Uber के एल्गोरिथ्म डिवाइस-विशिष्ट मेटाडेटा का ध्यान रखते हैं या प्लेटफार्मों के बीच A/B टेस्टिंग कर रहे हैं।”

The Experiment:
I conducted an experiment using four devices two Android and two iOS logged into the same Uber account. I checked fares for the same location and ride at the exact same time. Additionally, I observed the impact of battery percentage on pricing. The results were…

— Rishabh Singh (@merishabh_singh) January 18, 2025

बैटरी प्रतिशत का प्रभाव-

एक दिलचस्प और चौंकाने वाली बात यह थी, कि जिन डिवाइसों की बैटरी कम थी, उनमें किराया अधिक था। रिषभ सिंह ने इसे एक व्यवहारिक रणनीति बताया, जहां कम बैटरी वाले उपयोगकर्ता अधिक कीमतों को स्वीकार करने के लिए अधिक तैयार होते हैं। उन्होंने इसे “Behavioral Economics” की अवधारणा से जोड़ा और कहा, “सिस्टम का यह काम यूज़र्स की स्थिति का फायदा उठाना हो सकता है, खासकर जब वे जल्दी में होते हैं और ज्यादा कीमत देने को तैयार होते हैं।”

एक संयोग या साजिश?

रिषभ ने बताया, कि कम बैटरी वाले डिवाइसों में यात्रा का किराया ज्यादा था, जो व्यवहारिक अर्थशास्त्र की थ्योरी के अनुरूप है। ” सिंह ने कहा, यह एक तरह से यूज़र्स के मनोविज्ञान का उपयोग कर रहा हो सकता है, जहां जल्दी में होने के कारण उन्हें ज्यादा किराया स्वीकार करने का मानसिक दबाव होता है।”

यूजर डेटा का दुरुपयोग?

रिषभ सिंह ने इस पर गंभीर सवाल उठाया, कि क्या Uber अपने यूज़र्स के डिवाइस डेटा (जैसे डिवाइस टाइप और बैटरी लेवल) का उपयोग करके किराये को बढ़ा देता है। उन्होंने इस पर जोर दिया, कि उपयोगकर्ताओं को यह जानने का अधिकार होना चाहिए, कि किराया कैसे तय किया जा रहा है और क्या व्यक्तिगत डेटा का इस पर कोई असर है।

“जब तक प्लेटफॉर्म अपने मूल्य निर्धारण तंत्र में पारदर्शिता नहीं लाता, तब तक उपयोगकर्ता का विश्वास घटता रहेगा,” उन्होंने कहा। सिंह ने अपने पोस्ट के अंत में एक “कॉल टू एक्शन” दिया और लोगों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर अपनी राय साझा करें और तकनीकी उत्पादों में पारदर्शिता और नैतिकता के लिए आवाज़ उठाएं।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया-

रिषभ सिंह के इन पोस्ट्स पर सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ गई। कई यूज़र्स ने उनकी शोध को सराहा, जबकि कुछ ने चिंताओं का इज़हार किया। एक यूज़र ने कहा, “यह बहुत ही चिंताजनक है, मैं आपके काम की सराहना करता हूं।” वहीं दूसरे यूज़र ने पूछा, “क्या इन कैब एग्रीगेटर्स पर निगरानी रखने वाली कोई एजेंसी है?”

कुछ यूज़र्स ने सुझाव दिया कि रिषभ को अन्य राइड-हैलिंग ऐप्स और ग्रॉसरी ऐप्स पर भी ऐसा ही प्रयोग करना चाहिए, ताकि व्यापक निष्कर्ष निकाले जा सकें।

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Uber के प्राइज़िंग सिस्टम को उजागर-

रिषभ सिंह के प्रयोग ने न केवल Uber के प्राइज़िंग सिस्टम को उजागर किया, बल्कि इसने यह सवाल भी खड़ा किया कि क्या यह प्रणाली पूरी तरह से पारदर्शी और नैतिक है। यह मामला सिर्फ Uber तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समग्र रूप से डिजिटल प्लेटफार्मों की पारदर्शिता और यूज़र्स के डेटा के उपयोग पर विचार करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

किराया संरचना में पारदर्शिता, उचित मूल्य निर्धारण और यूज़र डेटा के दुरुपयोग पर बहस अब और तेज़ हो गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा, कि Uber इस मुद्दे पर किस तरह की प्रतिक्रिया देता है। इस समय तक, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, कि यात्रा सेवाओं के प्लेटफॉर्म यूज़र्स के अधिकारों का सम्मान करें।

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TAGGED:DELHIEngineerHUBpricingRishabh Singhuber
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