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Dastak India > Home > ऑटो > दिल्ली एनसीआर में पेट्रोल-डीजल वाहनों का युग अब होगा समाप्त: 2027 तक सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों का राज
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दिल्ली एनसीआर में पेट्रोल-डीजल वाहनों का युग अब होगा समाप्त: 2027 तक सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों का राज

Dastak Web Team
Last updated: March 23, 2025 9:54 am
Dastak Web Team
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Nitin Gadkari EV Policy
Photo Source - Google
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Nitin Gadkari EV Policy: दिल्ली एनसीआर में अगर आप भी डीजल या पेट्रोल की गाड़ी चलाते हैं, तो समझिए ये आपकी आखिरी गाड़ी होगी। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक बड़ा ऐलान किया है। जिसने वाहन मालिकों के बीच हलचल मचा दी है। गडकरी जी के अनुसार, 2027 तक उनकी योजना है, कि दिल्ली से पेट्रोल और डीजल वाहनों को पूरी तरह फेज आउट कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया, कि इसकी जगह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाया जाएगा। “दिल्ली की ईवी पॉलिसी के तहत यह परिवर्तन किया जाएगा। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बदलाव के लिए कौन सा मॉडल अपनाया जाएगा, इसके बारे में उन्होंने अभी तक कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।

Contents
Nitin Gadkari EV Policy क्यों जरूरी है यह कदम?Nitin Gadkari EV Policy क्या होगा मौजूदा वाहनों का?Nitin Gadkari EV Policy क्या आपको नई कार खरीदने से पहले सोचना चाहिए?सरकार की ईवी पॉलिसी और सब्सिडी-ऑटो इंडस्ट्री पर प्रभाव-नागरिकों की राय-क्या सफल होगा यह प्रयास?

Nitin Gadkari EV Policy क्यों जरूरी है यह कदम?

दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुकी है। हर साल दीवाली के आसपास प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच जाता है, जिससे शहर एक गैस चैम्बर में तब्दील हो जाता है। AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 400-500 के आसपास पहुंच जाता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।

सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण बढ़ाने में वाहनों से निकलने वाला धुआं एक प्रमुख कारक है। दिल्ली में लगभग 1.3 करोड़ वाहन हैं, जो हर दिन लाखों लीटर ईंधन जलाते हैं और हवा में प्रदूषक छोड़ते हैं। प्रदूषण के अलावा, जीवाश्म ईंधन की बढ़ती कीमतें और उनकी सीमित उपलब्धता भी सरकार को ईवी की ओर जाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए भारत ने भी प्रतिबद्धता जताई है।

Nitin Gadkari EV Policy क्या होगा मौजूदा वाहनों का?

सरकार के इस फैसले से पहले से ही दिल्ली एनसीआर में वाहन मालिकों के बीच चिंता का माहौल है। क्या उन्हें अपनी मौजूदा गाड़ियां बेचनी होंगी? क्या स्क्रैप करनी होंगी? या फिर कोई रिट्रोफिटिंग विकल्प होगा?

वैसे तो अभी इसके विस्तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन पिछले अनुभवों से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि सरकार फेज्ड अप्रोच अपनाएगी। जैसा कि आपने पिछले दिनों देखा होगा, 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों को सरकार ने पेट्रोल पंपों से ईंधन देने से मना कर दिया है। इतना ही नहीं, ऐसे वाहनों को दिल्ली की कॉलोनियों से उठाया जा रहा है और स्क्रैप सेंटरों पर भेजा जा रहा है।

Nitin Gadkari EV Policy क्या आपको नई कार खरीदने से पहले सोचना चाहिए?

अगर आप दिल्ली एनसीआर में रहते हैं और नई पेट्रोल या डीजल गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इस बारे में गंभीरता से विचार करें। यदि सरकार 2027 तक इन वाहनों पर प्रतिबंध लगाती है, तो आपका निवेश फायदेमंद साबित नहीं हो सकता। “मैंने पिछले साल ही एक नई डीजल SUV खरीदी थी। अब मैं सोच रहा हूं कि क्या 5 साल में ही इसे बेच देना होगा?” गुड़गांव के निवासी अमित शर्मा ने हमारे संवाददाता से कहा। एक ऑटोमोबाइल डीलर ने गुमनाम रहने की शर्त पर बताया, “पिछले 6 महीने से ही हमें ईवी के बारे में ज्यादा पूछताछ मिल रही है। लोग भविष्य के बारे में सोच रहे हैं और अपने निवेश को सुरक्षित रखना चाहते हैं।”

सरकार की ईवी पॉलिसी और सब्सिडी-

दिल्ली सरकार पहले से ही ईवी खरीदने पर सब्सिडी दे रही है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने पर 30,000 रुपये तक और इलेक्ट्रिक कारों पर 1.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल रही है। इसके अलावा, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में भी छूट दी जा रही है। हालांकि, अभी भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एक बड़ी चुनौती है। दिल्ली में वर्तमान में लगभग 2,500 चार्जिंग स्टेशन हैं, जबकि एनसीआर में करीब 1,000 और हैं। 2027 तक इनकी संख्या बढ़ाकर 20,000 से अधिक करने की योजना है। दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया, “इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर तेज़ी से काम चल रहा है। हमारा लक्ष्य है कि हर 3 किलोमीटर के दायरे में एक चार्जिंग स्टेशन हो।”

ऑटो इंडस्ट्री पर प्रभाव-

इस बड़े परिवर्तन का असर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर भी देखने को मिलेगा। टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंडई और एमजी जैसी कंपनियां पहले से ही ई-व्हीकल सेगमेंट में आक्रामक रूप से निवेश कर रही हैं। “हम इस बदलाव के लिए तैयार हैं। हमारा लक्ष्य 2026 तक अपने पोर्टफोलियो का 40% हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहनों का बनाना है,” एक प्रमुख कार निर्माता के प्रवक्ता ने बताया। दूसरी ओर, जो कंपनियां अभी भी पूरी तरह से पारंपरिक ईंधन वाहनों पर निर्भर हैं, उन्हें अपनी रणनीति में बदलाव लाना होगा। इससे नौकरियों और निवेश पैटर्न पर भी असर पड़ सकता है।

नागरिकों की राय-

इस फैसले पर दिल्ली के नागरिकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं। एक ओर जहां पर्यावरण के प्रति जागरूक लोग इसे सराह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोगों को इसके व्यावहारिक पहलुओं की चिंता है। “प्रदूषण कम करने का कोई भी प्रयास स्वागत योग्य है, लेकिन सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर जोर देना होगा। अभी भी लंबी यात्राओं के लिए ईवी पर निर्भर रहना मुश्किल है,” नोएडा के रहने वाले अमन गुप्ता ने कहा। रोहिणी की रहने वाली सुनीता मिश्रा ने कहा, “मैं अपनी बेटी को स्कूल ड्रॉप करने के लिए स्कूटी का इस्तेमाल करती हूं। अगर इलेक्ट्रिक स्कूटी का रेंज अच्छा होगा और चार्जिंग आसान होगी, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है।”

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क्या सफल होगा यह प्रयास?

दुनिया के कई शहरों ने पहले ही इस तरह के कदम उठाए हैं। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो, लंदन और एम्स्टर्डम जैसे शहरों में जीवाश्म ईंधन वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से कम किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली एनसीआर में यह बदलाव चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन असंभव नहीं। सरकार, निजी क्षेत्र और नागरिकों के सामूहिक प्रयास से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

“अगर हम 2027 तक का लक्ष्य नहीं भी पूरा कर पाते, तो भी यह दिशा सही है। हमें पर्यावरण के लिए कुछ कठोर फैसले लेने होंगे,” पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सुनीता नारायण ने कहा। इस बीच, अगर आप भी दिल्ली एनसीआर में रहते हैं, तो अगली बार गाड़ी खरीदते समय ईवी विकल्पों पर विचार करना न भूलें। भविष्य इलेक्ट्रिक है, और यह भविष्य पहले से कहीं ज्यादा करीब आ चुका है।

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