Mall Road History: शिमला हो, मसूरी हो, नैनीताल हो या मनाली भारत के लगभग हर प्रमुख हिल स्टेशन में एक चीज़ जरूर मिलेगी, मॉल रोड। ये सिर्फ शॉपिंग या फूड की जगह नहीं, बल्कि पहाड़ों और घाटियों के पैनोरमिक व्यू का बेजोड़ नजारा भी पेश करती हैं। शिमला की मॉल रोड, जो स्कैंडल पॉइंट से टेलीग्राफ ऑफिस तक फैली है, या दार्जिलिंग मॉल, जहां से कंचनजंगा की भव्य दृश्य दिखाई देता है, हर एक की अपनी विशेषता है।
ऐतिहासिक विरासत और कनेक्शन (Mall Road History)-

मॉल रोड का इतिहास भारत के औपनिवेशिक काल से जुड़ा है। 1800 के अंत में, जब बृतानवी अधिकारी भारत में थे, उन्होंने लंदन की ‘द मॉल’ से प्रेरित होकर इन सड़कों का निर्माण करवाया। ये सड़कें विशेष रूप से मार्केट, रेस्तरां और मनोरंजन के लिए डिज़ाइन की गईं, ताकि बृतानवी नागरिकों की जरूरतें और सुविधाएं पूरी हो सकें।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व(Mall Road History)-
मॉल रोड केवल शॉपिंग का केंद्र नहीं हैं। मनाली की मॉल रोड पर स्थित प्रसिद्ध हिडिंबा मंदिर और उनके पुत्र घटोत्कच का मंदिर इसके धार्मिक महत्व को दर्शाता है। इन सड़कों पर विक्टोरियन वास्तुकला की झलक वाली इमारतें, चर्च, पोस्ट ऑफिस और क्लब आज भी मौजूद हैं।

आधुनिक समय में मॉल रोड का महत्व
आज मॉल रोड सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का केंद्र भी हैं। यहां स्थानीय हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्र और क्षेत्रीय विशेषताओं वाली दुकानें मिलती हैं। वाहनों की पाबंदी के कारण, लोग यहां आराम से टहल सकते हैं और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं।
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सामाजिक मिलन स्थल
मॉल रोड आज भी शाम की सैर, सामाजिक मुलाकातों और मनोरंजन गतिविधियों का केंद्र हैं। छोटे-बड़े बाजार, हैंडमेड शॉप्स, कैफे और रेस्तरां यहां की रौनक बढ़ाते हैं। यह खरीदारों और विक्रेताओं को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण हब है।

पर्यटन का आकर्षण केंद्र
पहाड़ी क्षेत्रों में मॉल रोड अक्सर सबसे चौड़ी और अच्छी तरह से रखरखाव वाली सड़कें होती हैं। यहां से मिलने वाले पर्वतों के मनोरम दृश्य, शांत वातावरण और विरासती इमारतें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
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