Video: युवाओं की हथेलियों पर चलकर शहीद की पत्नी ने किया नए घर का सफर पूरा

Updated On: Aug 16, 2019 12:15 IST

Dastak

Video Screenshot (Twitter)

मध्यप्रदेश के इंदौर में पड़ने वाले बेटमा गांव में एक शहीद की पत्नी ने अपने नए घर का सफर युवाओं की हथेलियों पर चलकर पूरा किया। गांव के युवाओं ने शहीद की पत्नी को नया घर भेंट किया और फिर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उसका गृहप्रवेश अपनी हथेलियां बिछाकर करवाया।

1992 में शहीद हुए बीएसएफ मोहन सिंह की पत्नी गांव में एक पुरानी झोंपडी में रहती थी। गांव के युवाओं को ये रास नहीं आया और उन्होंने शहीद की पत्नी के हालात बदलने की ठान ली। उन्होंने 11 लाख रुपए एकत्रित कर शहीद की पत्नी के लिए इस राशी से एक अच्छा घर बनवाया।

महिला का पूरा परिवार उस झोंपडी में रह रहा था जिसकी छत टूटी हुई थी। सरकार से भी गुहार के बावजूद कोई मदद उन्हें नहीं मिल पाई। महिला की ऐसी हालत देखकर गांव के युवाओं ने "वन चेक-वन साइन" नाम से अभियान की शुरुआत की। जिससे उन्होंने लोगों की मदद से विधवा की मदद के लिए 11 लाख रुपए एकत्रित कर लिए।

इस अभियान से जुडे विशाल राठी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने स्वतंत्रता दिवस और रक्षा बंधन के शुभावसर पर घर की चाबी शहीद की पत्नी को दी। उन्होंने इस अवसर पर हम सब को राखी भी बांधी। जल्द ही उनका परिवार नए घर में शिफ्ट हो जाएगा।

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मोहन सिंह जब शहीद हुए उस समय उनके एक तीन साल का बेटा था। उनकी पत्नी के गृर्भ में उस समय एक और बच्चा था। उनकी पत्नी ने हालातों से जुझते हुए अपने दोनों बच्चों को पाल पोष कर बड़ा किया। राठी के अनुसार घर बनाने में उनका 10 लाख रुपए का खर्च आया और बाकि के एक लाख रुपयों को शहीद मोहन सिंह की प्रतीमा बनाने में खर्च किया गया।

उन्होंने कहा, 'रक्षा बंधन और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, हमने उन्हें घर की चाबी भेंट की। उन्होंने हमें' राखी 'भी बांधी। जल्द ही परिवार नए घर में शिफ्ट होगा।'

शहीद होने पर सिंह का तीन साल का बेटा था। उनकी पत्नी, जो उस समय एक और बच्चे के साथ गर्भवती थी, दोनों बच्चों को उन सभी तरीकों से बड़ा किया, जिनके पास वह था।

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राठी के अनुसार, घर की कीमत 10 लाख रुपये है जबकि शेष एक लाख रुपये मोहन सिंह की प्रतिमा बनाने में खर्च किए जा रहे हैं। राठी के अनुसार मूर्ति लगभग तैयार है। इसे मुख्य सड़क पर स्थापित किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि हम गांव के सरकारी स्कूल का नाम बदल कर मोहन सिंह के नाम पर कर दें। जहां से उन्होंने पढ़ाई की है।

राठी ने कहा, "मूर्ति भी लगभग तैयार है। इसे मुख्य सड़क पर स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, सरकारी स्कूल के नाम पर भी प्रयास किए जा रहे हैं, जहां उन्होंने मोहन सिंह के बाद पढ़ाई की है।

https://twitter.com/SINGH_SANDEEP_/status/1162193390009634816

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