आईसीयू बेड के खाली होने की जानकारी से लेकर जरुरतमंदों तक मदद पहुंचाने में लगा है सीड्स

भारत में कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच प्रमुख मानवतावादी संगठन सीड्स स्वास्थ्य रक्षा की सुविधाओं पर बढ़ते बोझ को साझा करने के लिए आगे आया है।

Updated On: May 11, 2021 17:22 IST

Dastak

Photo Source- Seeds

भारत में कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच प्रमुख मानवतावादी संगठन सीड्स स्वास्थ्य रक्षा की सुविधाओं पर बढ़ते बोझ को साझा करने के लिए आगे आया है। यह संस्थान सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए स्वास्थ्य रक्षा के महत्वपूर्ण संसाधनों की सप्लाई बढ़ाने, वैक्सिनेशन अभियान बढ़ाने में मदद करने और कोविड केयर सेंटर की स्थापना के लिए सातों दिन 24 घंटे लगातार काम कर रहा है। सीड्स ने आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं तक सबकी पहुंच बढ़ाने के लिए नेशनल हेल्पलाइन की शुरुआत की है और अपनी सपोर्ट सर्विसेज का दायरा बढ़ाया है।

एनजीओ ने अपना एक प्रेस नोट जारी कर जानकारी दी है कि सीड्स सुभाष चंद बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2021 का विजेता है। संस्थान मुख्य रूप से समाज पर हाशिए पर छूट गए गरीबों और मूलभूत सुविधाओं से वंचित समुदाय को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ही अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो किसी भी तरह की आपदा के दौरान सहायता प्रदान करने की मुहिम में अक्सर पीछे छूट जाते हैं। मौजूदा समय में संस्थान जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारियों के माध्यम से 1000 ऑक्सिजन कंसंट्रेटर, 2000 पल्स ऑक्सिमीटर, 20 ऑक्सिजन जेनरेटर, 6000 फेस फास्क (पीपीई), 5000 पीपीई किट, 300 बेड, मरीजों की देखभाल के लिए 2000 कंबलों का प्रबंध करने और उनका वितरण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके अलावा दिल्ली, एनसीआर (गुरुग्राम, नोएडा) और उत्तराखंड के कोविड केयर अस्पतालों में मरीजों की देखभाल के आवश्यक उपकरणों की सप्लाई भी सीड्स की ओर से की जा रही है।

कोरोना के मरीजों की मदद करने के असल जज्बे पर पूरी तरह खरा उतरते हुए सीड्स ने हफ्ते में सातों दिन नेशनल हेल्पलाइन “कोविड फ्रंटलाइन” भी शुरू की है। मरीजों तक कई सेवाओं की महत्वपूर्ण सूचनाएं पहुंचाने के लिए इसमें लोगों को जोड़ा जा रहा है। ऑक्सिजन, अस्पताल के बेड और दवाइयों की उपलब्धता के बारे में सूचना देकर लोगों की मदद की जा रही है। मरीजों में अकेलेपन और बेचैनी की शिकायत को दूर करने के लिए काउंसलिंग की जा रही है। घर में कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए आवश्यक सूचना दी जा रही है और मरीजों को डॉक्टरों से परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। यह पहल उन लोगों की मदद के लिए खासतौर पर की गई है, जो आम जनता को मदद प्रदान करने की मुहिम में अक्सर रेडार से बाहर रह जाते है। उनके पास सोशल मीडिया पर दी जाने वाली जानकारी का लाभ उठाने की कोई सुविधा भी नहीं होती।

सीड्स विकेंद्रीयकृत समाधान के तौर पर स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस 10 कोविड केयर्स और आइसोलेशन सेंटर बनाने के साथ राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहा है। सीड्स समाज में वंचित और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों की मदद के लिए सामूहिक रूप से बेंगलुरु, दिल्ली, गुरुग्राम, हावड़ा, हैदराबाद, मथुरा, मुंबई, पुणे और संगरूर में कोविड केयर और आइसोलेशन केयर सेंटर बनाने पर काम कर रहा है। हर केयर सेंटर में कम से कम 20 बेड होंगे। हर कोविड केयर सेंटर को उसके पास स्थित सरकारी अस्पताल से जोड़ा जाएगा। सभी केयर सेंटर राज्य सरकार और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचईडब्ल्यू) की ओर से कोरोना के बचाव के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। पूर्वी दिल्ली में चलाए जा रहे वैक्सिनेशन अभियान के अलावा सीड्स ने महाराष्ट्र, पंजाब, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में 1,00,000 से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए इन राज्यों में अपने वैक्सिनेशन अभियान की शुरुआत की है। पहले चरण में वैक्सिनेशन अभियान को भारत के विभिन्न राज्यों में 6 महीने तक चलाया जाएगा। इन जगहों पर सीड्स की टीम और वॉलंटियर डोर-टु-डोर जा रहे हैं। इससे लोगों को वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने में मदद मिल रही है। वैक्सिनेशन से पहले और बाद में अपने स्वास्थ्य की देखभाल के लिए जनजागरूकता जगाई जा रही है। इसके लिए वैक्सिनेशन के शेड्यूल की भी लोगों को जानकारी दी जा रही है।

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अगर लोग वैक्सिनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन करने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं तो सीड्स की टीम के सदस्य इस प्रक्रिया की जानकारी देकर उनकी मदद कर रहे हैं। वह इन लोगों को वैक्सिनेमन के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया की जानकारी देने में मदद कर रहे हैं। सीड्स की टीम के सदस्य लगातार लोगों को यह जानकारी प्रदान कर रहे हैं कि किन अस्पतालों में उन्हें ऑक्सिजन, वेंटिलेटर और बेड की सुविधा कब तक मिल सकती है। इसके अलावा टीम के सदस्य वैक्सिनेशन की अगली डेट के बारे में पूरी तरह अपडेट और तैयार रहते हैं।

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