सोमनाथ मंदिर के नरसंहार से जुड़ी किताब लेकर आ गए हैं लेखक अमिश त्रिपाठी

देश में लंबे समय के बाद तालाबंदी से राहत मिलते ही एक के बाद एक नई किताबों का आना शुरू हो चुका है। इस क्रम में सबसे आगे नजर आए लेखक अमीश त्रिपाठी। द इम्मोर्टल्स ऑफ मेलुहा के लेखक अमीश ने अपनी नई किताब लीजेंड ऑफ सुहेलदेव: द किंग हू सेव्ड इंडिया के शुभारंभ की घोषणा की है।

Updated On: Jun 21, 2020 18:11 IST

Dastak Online

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देश में लंबे समय के बाद तालाबंदी से राहत मिलते ही एक के बाद एक नई किताबों का आना शुरू हो चुका है। इस क्रम में सबसे आगे नजर आए लेखक अमीश त्रिपाठी। द इम्मोर्टल्स ऑफ मेलुहा के लेखक अमीश ने अपनी नई किताब लीजेंड ऑफ सुहेलदेव: द किंग हू सेव्ड इंडिया के शुभारंभ की घोषणा की है। वेस्टलैंड पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रकाशित यह उपन्यास भारत की 11वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है।

इस सच्चाई से जुड़ी है इस किताब की कहानी-

पुस्तक की शुरुआत महमूद गजनी के आक्रमण और पवित्र सोमनाथ मंदिर के नरसंहार से होती है। इसके बाद योद्धा-राजा सुहेलदेव साहसिक कार्य के साथ वो विभिन्न धर्मों के लोगों को एक साथ लाने के लिए आगे बढ़ते हैं। इसको लेकर लेखक का यह भी कहना है कि कहीं ना कहीं भारत के लोगों को इस समय इस सच्चाई को जानने की जरूरत ज्यादा है।

इस किताब को लेकर क्या कहा लेखक अमिश ने-

इस किताब पर लेखक अमिश ने कहा कि लीजेंड ऑफ सुहेलदेव: द किंग हू सेव्ड इंडिया लिखने के पीछे का उनका विचार राष्ट्रीय चेतना को एक प्रेरक कहानी में गठना था, जिसे भारतीय इतिहास के पन्नों में अनदेखा किया गया है। यह एक ऐसी कहानी है जिसकी आज विशेष मांग है। सुहेलदेव की कथा एक ऐसे राजा की कहानी है जो राष्ट्र के पुरुषों और महिलाओं को एकजुट करता है, चाहे उनका धर्म, जाति, क्षेत्र या समाज आपस में भिन्न क्यों ना हो। यह एक महाकाव्य साहसिक और एकता की एक प्रेरणादायक कहानी है। राजा सुहेलदेव का संदेश है कि जब हम भारतीय एकजुट होते हैं, तो हम अपराजेय होते हैं।

क्या इस किताब को अमिश ने नही लिखा है-

यह अमर लेखकों के केंद्र के तहत लिखी गई पहली पुस्तक है। यह लेखकों की एक टीम है जो मटेरीयल को संचालित करने और पहले ड्राफ्ट की रचना करने में अमीश की मदद करती है। हालाँकि लेख का विचार और पांडुलिपि को समझने का काम लेखक के द्वारा ही किया गया है।

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अमिश को दुनियाभर के लोग पढ़ना चाहते हैं-

वेस्टलैंड पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ गौतम पद्मनाभन ने कहा कि अमीश की पुस्तकों को जनता और आलोचकों दोनों द्वारा पसंद किया जाता है। अब तक कुल बुकों की 5.5 मिलियन से अधिक प्रतियां छापी गई हैं। इसी के साथ इन पुस्तकों को कई पुरस्कार भी मिले हैं। अमर लेखक केंद्र की पहल के साथ काम करने के लिए वो उत्साहित हैं।  इससे उन्हें अमीश के दिमाग से कई और कहानी के विचारों को उन पुस्तकों में बदलने की अनुमति मिलेगी जिन्हें दुनिया पढ़ना चाहती है।

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