डीयू में इस साल पहले के मुकाबले कम छात्रों ने किया अप्लाई, जानें इसके पीछे का कारण

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में इस साल पिछले साल की तुलना में 70 हजार से कम छात्रों ने पंजीकरण कराया है, इस साल ग्रेजुएशन के प्रोग्राम में 2.17 लाख छात्रों ने अप्लाई करा है।

Updated On: Oct 15, 2022 19:30 IST

Dastak

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अमीषा पटेल

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में इस साल पिछले साल की तुलना में 70 हजार से कम छात्रों ने पंजीकरण कराया है, इस साल ग्रेजुएशन के प्रोग्राम में 2.17 लाख छात्रों ने अप्लाई करा है। बीते साल डीयू में 2.87 लाख छात्रों ने अप्लाई किया था, वहीं अगर 2020 की बात करें तो तब 3.53 लाख छात्रों ने दाखिले के लिए अप्लाई किया था।  चलिए जानते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना से इस वर्ष रजिस्ट्रेशन इतनी कम क्यों है I

क्या है डीयू में रजिस्ट्रेशन कम होने की बड़ी वजह-

माना यह जा रहा है कि इस बार रजिस्ट्रेशन कम होने की सबसे बड़ी वजह जो निकलकर सामने आई है वो है एडमिशन की तारीख की घोषणा। बीते साल जल्दी एडमिशन की तारीख आई थी, लेट घोषणा के कारण इस बार कम दाखिले आ पाए हैं। पहले डीयू छात्रों के 12वीं के अंकों के हिसाब से उन्हें दाखिला दिया करता था, लेकिन इस बार उन्हें कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के अंकों के आधार पर ही विश्वविद्यालय में दाखिला दिया जा रहा है।

बीते साल डीयू का पंजीकरण पोर्टल 2 अगस्त से 31 अगस्त के बीच खोला गया था, जो एक माह के करीब खुला रहा। हालांकि इस बार इसे 12 सितंबर को खोला गया और 13 अक्टूबर को बंद कर दिया गया। इस हिसाब से छात्रों को डीयू में अप्लाई करने का मौका करीब महीने की देरी से मिला। ऐसे में बहुत से छात्र पहले ही अन्य विश्वविद्यालयों में एडमिशन ले चुके थे। विश्वविद्यालय के अधिकारी का कहना है कि यह भी कम नहीं है, पिछले वर्ष की तरह ही है। विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार प्रार्थना करने की अंतिम दिन गुरुवार तक 2,17,156 कैंडिडेट ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

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कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (CSAS) के माध्यम से प्रवेश तीन भागों में बाटा गया है I (CSAS-2022) आवेदन पत्र जमा करना दूसरा कार्यक्रमों का चयन और वरीयताएं भरना और सीट आवंटन और प्रवेश करना I यूनिवर्सिटी के अधिकारी से मीडिया द्वारा पूछा गया तो उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रेशन की संख्या कम नहीं है, हर साल इतनी ही संख्या होती है I उन्होंने कहा कि सीयूईटी टेस्ट इतनी देरी से आयोजित किया गया था कि छात्रों को पहले ही अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिल गया था। यही कारण है कि इस साल संख्या काफी कम है. इस वर्ष जल्दबाजी में सीयूटी को लागू करने की क्या जरूरत थी, अगर यह लागू नहीं होता तो रजिस्ट्रेशन में गिरावट नहीं आती I

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