ऑनलाइन क्लासेस के लिए एचआरडी मंत्रालय जल्द लेकर आने वाला है गाइडलाइंस

एचआरडी मंत्रालय ऑनलाइन कक्षाओं के लिए SOP पर काम कर रहा है, जिससे छात्रों को ऑनलाइन क्लासेस लेने के लिए कंप्यूटर या फोन पर घंटों नहीं बैठना पड़ेगा और वह सामान्य रफ्तार से सीख सकेंगे।

Updated On: Jun 17, 2020 18:19 IST

Dastak Web

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD Ministry) ऑनलाइन कक्षाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) पर काम कर रहा है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि छात्रों को डिजिटल क्लासेस लेने के लिए कंप्यूटर या फोन पर घंटों बिताने की जरूरत नहीं होगी और उन्हें सामान्य गति से सीखने में मदद मिले। कोरोना वायरस (Covid-19) के कारण नॉर्मल क्लासरूम की जगह अब ऑनलाइन क्लास ने ले लिया है क्योंकि स्कूल लगभग तीन महीने से बंद है और आगे भी बंद रहने की उम्मीद है। ऐसे में नियमित स्कूल जैसी ऑनलाइन कक्षाएं, जिसने बच्चों के स्क्रीन टाइम को बढ़ाया है। उसको देखते हुए अभिभावकों की शिकायतों के मद्देनजर दिशानिर्देश बनाए जा रहे हैं। माता-पिता ने यह भी सिकायत की है कि कुछ घरों में सिर्फ एक डीवाइस होता है और इसका इस्तेमाल एक बार में केवल एक बच्चा कर सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक तरफ तो स्कूलों ने अपने परिसर के भीतर मोबाइल फोन की अनुमति नहीं दी और इसके उपयोग को लेकर छात्रों को हतोत्साहित किया और अब वे पूरे दिन इलेक्ट्रॉनिक डीवाइस पर निर्भर हैं। एक स्वस्थ पहलुओं को सुनिश्चित करने के लिए एक संतुलन बनाना होगा। अधिकारी के मुताबिक विभिन्न हितधारकों के परामर्श से दिशा-निर्देशों को तैयार किया जा रहा है। छात्रों को लंबे समय तक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सामने ना बैठना पड़े उसके लिए ऑनलाइन कक्षाओं की एक निश्चित अवधि तय की जाएगी।

अधिकारी ने कहा कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना, साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करना और छात्रों के लिए सुरक्षित और सुलभ सीखने का माहौल सुनिश्चित करना दिशा-निर्देशों के फोकस क्षेत्रों में से एक होगा। कोरोना वायरस के कारण सुरक्षा उपायों के तहत देश भर के विश्वविद्यालयों और स्कूलों को 16 मार्च से बंद कर दिया गया है। बता दें 24 मार्च को देशव्यापी तालाबंदी की घोषणा की गई थी। वहीं, अब सरकार ने बड़े पैमाने पर प्रतिबंधों में ढील दी है। हालांकि स्कूल और कॉलेज अभी बंद रहेंगे।

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हाल ही में स्कूल शिक्षा सचिव अनीता करवाल ने कोरोना काल में स्कूलों के भविष्य पर अशोका विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में दिशानिर्देशों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा में उतार-चढ़ाव आया है और जिस तरह से कुछ स्कूल कर रहे हैं, उस पर भी हंगामा हो रहा है। कुछ स्कूलों ने केवल टाइम टेबल दोहराया है और बच्चे सात से आठ घंटे तक डिवाइस के सामने बैठ रहे हैं। उन्होंने कहा जब हमने ई-लर्निंग पर जोर दिया, तो हमारा फोकस ई-लर्निंग की पहुंच तक था। इक्विटी के बिना प्रौद्योगिकी हमारे सभी बच्चों के लिए एक प्रभावी शिक्षा नहीं प्रदान कर सकती है।

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