जुलाई के अंत तक बंद रह सकते हैं स्कूल, बुरे सपने में बदल सकता है वर्चुअल क्लासेस का सहारा

कोरोना वायरस (Covid-19) के मामलों में तेजी से वृद्धि होने के बाद से जुलाई में सरकारी और निजी दोनों स्कूलों के फिर से खुलने की संभावना अब कम दिखती है। ऐसे में जुलाई में भी डिजिटल और वर्चुअल क्लासेस का आयोजन जारी रह सकता है।

Updated On: Jun 22, 2020 13:21 IST

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कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामलों में तेजी से वृद्धि होने के बाद से जुलाई में भी सरकारी और निजी दोनों स्कूलों के फिर से खुलने की संभावना अब कम दिखती नजर आ रही है। वहीं, कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अगले महीने गर्मियों की छुट्टी खत्म होने के बाद, कक्षाओं का संचालन वर्चुअल रूप से आयोजित किए जाने की संभावना है। दिल्ली में भी बढ़ते कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण स्कूलों का जुलाई में दोबारा खुलना मुश्किल लग रहा है। ऐसे में सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाओं पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।

बुरे सपने में बदल सकता है वर्चुअल क्लासेस-

बता दें मार्च में कोरोना वायरस महामारी के कारण सुरक्षा उपायों के तहत देशभर में लॉकडाउन लगाया गया। जिसके बाद से स्कूलों और कॉलेजों को बंद करना पड़ा और आगे भी बंद रहने की संभावना है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का नुक़सान ना हो इसलिए स्कूल और कॉलेज संस्थानों को वर्चुअल दुनिया का सहारा लेना पड़ा ताकि वह बच्चों को शिक्षा और लर्निंग एक्टिविटीज को कराया जा सकें। हालांकि, कई विशेषज्ञों का कहना है कि देश में डिजिटल विभाजन ऑनलाइन कक्षाओं का परिचालन बुरे सपने (Operational Nightmare) में बदल सकता है।

स्कूलों के प्रमुख माइक्रो प्लान की करें तैयारी-

वहीं, पिछले हफ्ते दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सरकार के सभी स्कूलों के प्रिंसिपल को स्कूलों को खोलने के लिए एक माइक्रो-प्लान तैयार करने का निर्देश दिया था। इसमें कहा गया था कि सभी स्कूलों के लिए एक आम योजना नहीं चल सकती है। बता दें कि शिक्षा मंत्री ने एक हजार से अधिक दिल्ली सरकार के स्कूल प्रिंसिपलों के साथ बातचीत करते हुए कहा था कि इस साल सभी स्कूलों को फिर से खोलने के लिए हमारे पास एक आम योजना नहीं है।

स्कूल हमारे सामाजिक जीवन का एक अभिन्न अंग- सिसोदिया

उन्होंने कहा कि हम एक विस्तृत योजना प्रक्रिया का अनुसरण कर रहे हैं क्योंकि हमें निर्णय लेने से पहले कई चीज़ों को ध्यान में रखना होगा। यह केवल सामाजिक दूरी या स्वच्छता को बनाए रखने या कक्षाओं के एक सेट को स्कूल में रखने और दूसरों को नहीं, रखने के बारे नहीं में है। किसी भी निर्णय का बच्चों और उनके परिवारों पर प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि स्कूल हमारे सामाजिक जीवन का एक अभिन्न अंग है।

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उन्होंने कहा कि यह केवल पाठ्यपुस्तकों से कुछ सबक सीखने के बारे में नहीं है, बल्कि जीवन के सबक भी हैं। इसलिए, किसी भी योजना को सभी संभावित स्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने स्कूल प्रमुखों से अपील की कि वे सभी प्रमुख हितधारकों को शामिल करते हुए स्कूल स्तर पर गहन विचार-मंथन का नेतृत्व करें और समय आने पर संक्रमण का नेतृत्व करने के बारे में माइक्रो प्लान के साथ आएं।

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