फरीदाबाद खोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम अरावली जंगल की जमीन कब्जामुक्त चाहते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ कहा कि हम चाहते हैं कि जंगल की जमीन को कब्जामुक्त किया जाए। हरियाणा सरकार और फरीदाबाद नगर निगम द्वारा फरीदाबाद के अरवाली क्षेत्र में पड़ने वाले खोरी गांव के अवैध अतिक्रमणों पर स्टे मांगा था।

Updated On: Jun 17, 2021 19:46 IST

Ajay Chaudhary

फरीदाबाद के खोरी गांव में तोडफोड के विरोध में जमा वहां के स्थानीय निवासी (Photo Source- Social Media)

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ कहा कि हम चाहते हैं कि जंगल की जमीन को कब्जामुक्त किया जाए। हरियाणा सरकार और फरीदाबाद नगर निगम द्वारा फरीदाबाद के अरवाली क्षेत्र में पड़ने वाले खोरी गांव में अवैध रुप से बने 10 हजार आवासीय अतिक्रमणों को हटाने के कोर्ट के निर्देश पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने राज्य और नगर निगम को इस संबध में उनके द्वारा सात जून को दिया गया आदेश का पालन करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे से संबधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए फरीदाबाद नगर निगम और हरियाणा सरकार को अरावली वन क्षेत्र से सभी अतिक्रमणों को हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जमीन हथियाने वाले न तो निष्पक्षता की बात कर सकते हैं और वो न ही कानून या शासन की शरण ले सकते हैं।

कोर्ट ने छह सप्ताह के भीतर खोरी गांव के पास वन भूमि से सभी अतिक्रमण हटाकर राज्य सरकार से इसकी अनुपालन रिपोर्ट भी देने को कहा था। गुरुवार को वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई सुनवाई के दौरान यहां बने घरों को तोड़ने पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अपर्णा भट ने कहा कि यहां 10 हजार परिवार रहते हैं।

वकील अपर्णा भट कि बात पर कोर्ट ने कहा कि कृपया हमें नंबर न दें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। हम चाहते हैं कि वन भूमि को साफ किया जाए। हम पहले ही पर्याप्त समय दे चुके हैं। हमारे द्वारा अधिसूचना भी जारी की गई थी। लेकिन आप अपने जोखिम पर वहां बने रहे। पीठ ने साफ किया कि यह वन भूमि है, सामान्य भूमि नहीं है।

भट ने वहां रह रहे लोगों के पुनर्वास का मुद्दा भी उठाया है। भट्ट ने कहा कि राज्य ने अभी तक ये नहीं देखा है कि कौन पुनवार्स के लायक है और इससे संबधित पहचान प्रकिया भी शुरु नहीं की है। इसपर कोर्ट ने अपने पांच अप्रैल के ऑर्डर का हवाला दिया। जो उसने इस मुद्दे से संबधित एक मामले में पास किया था। कोर्ट ने कहा कि निगम और सरकार कानून के मुताबिक इसपर कदम उठाएंगे।

पीठ ने फरीदाबाद नगर निगम के वकील से कहा कि कानून के अनुसार आपको उन्हें बेदखल करना होगा। आपको केवल पात्र को योजना का लाभ देना होगा। वकील भट ने इसपर कहा कि वहां रहने वाले लोगों को जबरदस्ती नगर निगम उनके घर से बेदखल करना चाहता है। उनके घर तोडने से पहले कम से कम वहां रहने वाले लोगों का सत्यापन जरुर किया जाए।

पीठ ने इसपर पूछते हुए कहा कि क्या याचिकाकर्ताओं ने सत्यापन के लिए निगम को अतिरिक्त दस्तावेज दिए हैं, हमारे द्वारा पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है। भट्ट ने कहा कि कोर्ट को वहां रह रहे लोगों की स्थिती को भी देखना चाहिए। वे प्रवासी मजदूर हैं, उनके छोटे बच्चे हैं। साथ ही उन्होंने कोरोना महामारी की तरफ भी कोर्ट का ध्यान खींचा।

इसपर कोर्ट ने कहा कि यह सब राज्य का काम है। हमारा सरोकार केवल वन क्षेत्र को खाली कराने से है। हमने पहले भी काफी समय इसे दे चुके हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि वहां के लोग पहचान और पुनर्वास के लिए अपने दस्तावेज निगम को पेश कर सकते हैं।

इसके बाद वकील भट ने कोरोना महामारी के दौरान गैर-बेदखली के लिए वैश्विक दिशानिर्देशों का उल्लेख किया, तो पीठ ने कहा, “हम वैश्विक दिशानिर्देशों से चिंतित नहीं हैं। यह मुद्दा लंबे समय से चल रहा है।" पीठ ने कहा कि अब इस स्तर पर कोई ढिलाई नहीं दिखाई जा सकती।

कोर्ट में यह भी नोट किया गया कि याचिकाकर्ताओं को पुनर्वास के लिए फरीदाबाद नगर निगम के सामने अपने दस्तावेज पेश करने के लिए बाध्य किया गया था लेकिन वे इसमें विफल रहे थे। पीठ ने कहा कि वन भूमि पर अतिक्रमण को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए हटाया जाएगा।

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कोर्ट ने हरियाणा सरकार औ पुलिस को नगर निगम फरीदाबाद को कब्जा हटाने के लिए सभी आवश्यक सहायता देने का निर्देश भी दिया हैा कोर्ट ने सरकार के वकील की कब्जा होने के दौरान पथराव होने जैसी संभावनाओं को खारीज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आपको अपना काम कैसे करना है ये हम नहीं बता सकते।

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