चीन ने पहली बार स्वीकारा- गलवान घाटी में उसके इतने जवान मारे गए

चीन ने पहली बार स्वीकार किया है कि गलवान घाटी में हिंसक झड़प के दौरान उसके 20 से कम सैनिकों मारे गए थे। यह हिंसक झड़प चीन और भारत की सेना के बीच पिछले हफ्ते लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुई थी।

Updated On: Jun 23, 2020 16:13 IST

Dastak Online

Photo Source: Ssociologs

चीन ने पहली बार स्वीकार किया है कि गलवान घाटी में हिंसक झड़प के दौरान उसके 20 से कम सैनिकों मारे गए थे। यह हिंसक झड़प चीन और भारत की सेना के बीच पिछले हफ्ते लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुई थी। इसके बाद भारत ने 16 चीनी सैनिकों के शवों को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को सौंप दिया था। इस खबर के बाहर आने के बाद चीनी मीडिया ने चीन की तरफ से मरने वाले सैनिकों को लेकर अखबार में सूचना दी। इसमें अभी भी चीन की तरफ से कुल मरने वाले सैनिकों की सही संख्या को लेकर पर्दा नहीं उठाया गया है।

चीन ऐसा करके युद्ध टालना चाहता है-

इससे पहले अब तक सिर्फ भारतीय सेना ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की थी कि लद्दाख की गलवान घाटी में पीएलए के साथ संघर्ष में उसके 20 सैनिक शहीद हो गए थे। चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने सोमवार 22 जून को चीनी विशेषज्ञों के हवाले से एक बयान में कहा कि चीन ने अपने हताहतों की संख्या जारी नहीं की, इसका कारण यह है कि चीन युद्ध टालना चाहता है।

इस खुलासे से भारतीय सरकार दबाव में आ सकती थी-

ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि अगर चीन में सैनिकों के मरने की संख्या 20 से कम है तो इससे भारत सरकार दबाव में आ सकती थी। चीनी विशेषज्ञों ने भारतीय अधिकारियों पर कट्टरपंथियों को संतुष्ट करने के लिए चीन के हताहतों की संख्या को ज्यादा बढ़ा चढ़ा कर दिखाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इससे भारत अपने देश के राष्ट्रवादियों को संतुष्ट करना चाहता है।

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40 से ज्यादा सैनिकों के मरने के दावों को लेकर बौखलाया चीन-

ग्लोबल टाइम्स की इसी रिपोर्ट में केंद्रीय मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह का भी जिक्र किया गया है। उन्होने शनिवार को दावा किया था कि गलवान घाटी की झड़प में मारे गए पीएलए चीनी सैनिकों की संख्या 40 से अधिक है। चीनी मीडिया बार-बार बोलवचन के जरीए सच्चाई को झुपानें की कोशिश कर रहा है। बता दें कि चीनी मीडिया पूर्ण रूप से वहां की सरकार के कहने पर चलती है। भारत की तरह नाहीं वो एक लोकतांत्रिक देश है और नाहीं वहां की मीडिया स्वतंत्र है।

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