चीन ने लगाई भारतीय मीडिया वेबसाइट और टीवी चैनलों पर पूरी तरह रोक

चीन ने वीपीएन के माध्यमों से चलाई जा सकने वाली भारतीय साइटों और टीवी चैनलों को भी आईपी एड्रेस के सहारे पूरी तरह बैन कर दिया है। इसे 59 चीनी एप्पस के भारत में बैन के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।

Updated On: Jun 30, 2020 18:42 IST

Dastak

Photo Source- Pixabay

भारत चीन सीमा विवाद के कारण उपजे तनाव में भारत ने चीन पर साइबर हमला बोला जिसके तहत 59 चीनी एप्प के भारत में चलाने पर रोक लग गई। ऐसे में एक इस तरह की खबर पडोसी देश चीन से भी आ रही है। खबर की मानें तो चीन में अब आप भारत के अखबार और वेबसाइट नहीं चला सकते। हालांकि आप भारत में चीनी समाचार पत्र और वेबसाइट चला सकते हैं। चीन में अबतक केवल वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) के द्वारा ही आप भारतीय मीडिया वेबसाइटों तक पहुंच सकते थे। भारतीय टीवी चैनलों को भी आईपी टीवी के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता था। लेकिन अब पिछले दो दिनों से आईफोन और डेक्सटोप पर इन माध्यमों से भी भारतीय वेबसाईट और टीवी नहीं देखे जा सकते।

क्या है वीपीएन-

वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) एक शक्तिशाली उपकरण है, जो सार्वजनिक इंटरनेट कनेक्शन से निजी नेटवर्क बनाकर उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन गोपनीयता देता है। वीपीएन के उपयोगकर्ताओं का आईपी एड्रेस भी कोई एसस नहीं कर सकता। लेकिन चीन ने ऐसी तकनीकी रूप से एक ऐसी फ़ायरवॉल बनाई है कि वह वीपीएन पर भी रोक लगा देता है।

भारत सरकार के बैन के बाद चीन ने उठाया कदम-

पूर्वी लद्दाख के गैलवान घाटी क्षेत्र में 15 जून को हुए हिंसक गतिरोध के बाद भारत और चीन के बीच जारी तनाव के बीच हालिया कार्रवाई सामने आई है जिसमें दोनों पक्षों को नुकसान का सामना करना पडा। चीन की भारतीय साइटों पर प्रतिबंध की ये कार्रवाई तब सामने आई जब भारत सरकार ने टिकटॉक, यूसी ब्राउजर सहित 59 चीनी एप्पस के इस्तेमाल पर देश में प्रतिबंध लगा दिया। चीन दुनिया में सबसे मजबूत संसरशिप के रुप में जाना जाता है। चीन में उस वेबसाइट या लिंक को तुरंत ब्लॉक कर दिया जाता है जो कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ या विचारों से मेल नहीं खाता है।

फेसबुक से लेकर ये बडी साइटें चीन ने ब्लॉक की हुई हैं-

चीन दुनिया में सबसे मजबूत ऑनलाइन सेंसरशिप में से एक है। यह घरेलू इंटरनेट के उपयोग को भारी रूप से विनियमित और सेंसर करने के लिए जाना जाता है और किसी भी वेबसाइट या लिंक को सक्रिय रूप से अवरुद्ध करता है, जिसे कम्युनिस्ट पार्टी के कथानक के खिलाफ जाने के रूप में देखा जाता है।

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चीन मीडिया को ऐसे करता है कंट्रोल-

चीन की इस तकनीक को दुनिया में 'ग्रेट फ़ायरवॉल' के रूप में जाना जाता है।  चीन आईपी एड्रस को ब्लॉक करने, कीवर्ड के जरिए यूआरएल फिल्टर करने सहित तरीके से मीडिया को कंट्रोल वहां किया जाता है। नवंबर में साउथ चाईना मोर्निंग पोस्ट में छपे एक आर्टिकल के अनुसार पिछले कुछ सालों में चीन ने 10 हजार से अधिक वेबसाइटों को ब्लॉक किया है। जिसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, वाट्सएप्प से लेकर न्यूज साइट ब्लूमबर्ग, वॉल स्ट्रीट जर्नल, न्यूयार्क टाइम्स, ड्रापबाक्स और गुगल ड्राईव भी चीन ने ब्लॉक किया हुआ है।

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