महिला खतना- धार्मिक कर्मकांड के नाम पर महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है?

कई लोग मेरे कमरे में आए उन्होंने मुझे जबरदस्ती जमीन पर पटक दिया और फिर एक महिला ने मेरे शरीर के उस हिस्से को काट दिया। मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था, उन्होंने ऐसा क्यों किया।

Updated On: Apr 10, 2021 08:55 IST

Dastak

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अदिति गुप्ता

21वीं शताब्दी का दौर चल रहा है और आज पूरा विश्व विकास और शिक्षा के रास्ते पर अग्रसर हो रहा है और कई देशों ने अपनी पुरानी धार्मिक परंपराओं को जनमानस के हितों को ध्यान में रखकर उन्हें परिवर्तित कर दिया। लेकिन आज भी एक देश रूढ़िवादी मानसिकता से उभर नहीं पाया है। मिस्र - एक ऐसा देश, जहां आज भी महिला खतना जैसी असहनीय पीड़ा का दर्द सह रही हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक मिस्त्र में 15 से 49 साल की 87 फीसद महिलाओं का खतना हो चुका है और मिस्र की लगभग आधी आबादी इस धार्मिक कर्मकांड पर विश्वास रखती है।

"कई लोग मेरे कमरे में आए उन्होंने मुझे जबरदस्ती जमीन पर पटक दिया और फिर एक महिला ने मेरे शरीर के उस हिस्से को काट दिया। मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था, उन्होंने ऐसा क्यों किया। मैं उस वक्त बहुत छोटी थी, जिन बुजुर्गों से मैं स्नेह करती थी, उनके साथ मैंने ऐसा क्या बुरा कर दिया था कि वह मेरे ऊपर सवार हो गए। उन्होंने मेरी टांगे खोलकर मुझे इस कदर लहूलुहान कर दिया कि यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सदमा था। उसने मुझे ऐसी मानसिक यातना दी कि मैं लगभग अवसाद की स्थिति में पहुंच गई थी।"

यह दर्द है मिस्र की एक महिला का, उस महिला का नाम गोपनीय रखा गया है। एक साक्षात्कार में उन्होंने अपना दर्द बयान करते हुए बताया कि, उनके साथ जब यह घटना घटी थी वह महज 11 वर्ष की थी। आज इस घटना को 3 दशक बीत चुके हैं। उनके जीवन का वह मनहूस दिन आज भी उनके जेहन मे ताजा है।

वह कहती हैं परीक्षा में मेरे अच्छे नंबर आए थे लेकिन मेरा परिवार मुझे शाबाशी देने के बजाय एक आया को लेकर चला आया। आया काले कपड़ों में थी, फिर सब ने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और मुझे घेर कर खड़े हो गए। (पड़ोसी महिलाएं अक्सर खतने के लिए जरूरी औजारों को साथ लेकर चलती थी।)

गांव में रहते हुए दूसरे लोगों की तरह हमारा परिवार भी मुर्गी पालता था उन लोगों ने मेरे शरीर के उस अंग को काट कर मुर्गियों के बीच फेंक दिया और वह मुर्गियां उसे खाने में जुट गई। उस दिन के बाद से मैंने ना तो कभी चिकन खाया और ना ही मुर्गिया पाली। मेरा बचपन मेरी आजादी मुझसे छीन कर मुझे अपाहिज बना दिया गया। मेरी टांगे चीर दी गई। मुझे यह समझने में बहुत लंबा वक्त लग गया कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? और खतना कराने के क्या नतीजे हो सकते हैं?

उन्होंने साक्षात्कार में आगे बताया गांव वालों की मानसिक स्थिति आज भी रूढ़िवादी है जिन महिलाओं का खतना नहीं होता उनकी नजर वह कुल्टा (Characterless) और अपशगुनी मानी जाती है। दरअसल वे लोग एक ऐसी प्रथा को निभाते आ रहे हैं जिसका अर्थ वह खुद अच्छे से नहीं जानते है।

जब उनकी बेटी हुई तो उन्होंने ठान लिया था कि वह अपनी बेटी को इस दर्द से नहीं गुजरने देंगी। लेकिन अपने पति की जिद के आगे मजबूर हो गई और उन्हें रोक नहीं पाई। जब तक उनकी दूसरी बेटी हुई उस वक्त तक मिस्र में इस प्रथा को बैन कर दिया गया था। उसके बाद उन्होंने निर्णय किया कि वह इसके खिलाफ चुप नहीं बैठेंगी।

जिसके बाद से उन्होंने एल्डनबॉडी के लेक्चरो को अटेंड करना शुरू कर दिया। उन्होंने विमेन सेंटर फॉर गाइडेंस एंड लीगल अवेयरनेस(WCGLA) की ओर से जारी विज्ञापनों का भी अध्ययन किया और अंततः वह अपने पति को अल्टीमेटम देने में कामयाब हो गई हैं। उसने अपनी दूसरी बेटी को ऐसी जाहिल परंपरा का शिकार बनने से बचा लिया। वह कहती है कि उन्हें हमेशा से पता था कि यह गलत है, लेकिन उनके पास पर्याप्त तर्क नहीं थे कि वह लोगों को इसको लेकर समझा सके।

हालांकि साल 2008 में पूरे मिस्र में इस प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसे 7 साल की सजा हो सकती है और अगर कोई महिला अपनी सहमति से खतना कराना चाहती है तो उसे भी 3 साल की जेल हो सकती है। लेकिन इसके बावजूद भी मिस्र में महिलाओं के खतने की दर सबसे अधिक है।

महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाने वाली मिस्र की वकील रेडा एल्डन बॉडी ने अपने बयान में कहा कि आजकल खतने की प्रक्रिया प्लास्टिक सर्जरी करने के बहाने निपटाई जा रही है। मिस्र के काहिरा में स्थित सेंटर फॉर गाइडेंस एंड लीगल अवेयरनेस (WCGLA) महिलाओं के समर्थन में 3000 से ज्यादा केस लड़ चुका है जिसमें से वह 1830 जीत चुके हैं।

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