चीन से सीमा पर निपटने के लिए भारतीय सेना को मिली ये छूट

भारत और चीन के बीच गलवान घाटी को लेकर झड़प के बाद विवाद बढ़ता ही जा रहा है। भारत की तरफ से सीमा पर सेना को ज्यादा छूट देनें के लिए अहम कदम उठाए जा रहे हैं। विश्वभर में कोरोना वायरस संकट के बीच देश में इस मसले ने राजनीतिक नेताओं की नींद हराम कर दी है।

Updated On: Jun 22, 2020 12:43 IST

Dastak Online

Photo Source: TheDurban

भारत और चीन के बीच गलवान घाटी को लेकर झड़प के बाद विवाद बढ़ता ही जा रहा है। भारत की तरफ से सीमा पर सेना को ज्यादा छूट देने के लिए अहम कदम उठाए जा रहे हैं। विश्वभर में कोरोना वायरस संकट के बीच देश में इस मसले ने राजनीतिक नेताओं की नींद हराम कर दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवने, सीडीएस जनरल बिपिन रावत के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई।

इस बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सीमा पर सशस्त्र बलों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ किसी भी चीनी घुसपैठ और आक्रमण से निपटने के लिए पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी। इस फैसले से चीन को ज़ोरदार और स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई है। अब अगर चीन के सैनिक इस तरह की हरकत करते हुए नजर आए तो उनको बुरा परिणाम झेलना पड़ेगा।

इस नए बदलाव के साथ ही फील्ड कमांडरों को असाधारण परिस्थितियों में आग्नेयास्त्रों (Firearms) का उपयोग करने की स्वतंत्रता के साथ सशक्त बनाया गया है। इससे चीन के साथ एलएसी से जुड़े नियमों को भी बदल दिया गया है। 1996 और 2005 में हुए समझौतों के अनुसार, दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गोली नहीं चला सकते। इस समझौते में एलएसी के दोनों ओर 2 किलोमीटर की सीमा के भीतर विस्फोटक उपकरणों के उपयोग पर भी प्रतिबंध है।

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भारत द्वारा नियमों में किए गए इस अचानक बदलाव को गलवान घाटी संघर्ष में चीनी सैनिकों द्वारा शहीद हुए भारतीय सैनिकों के बदले के रूप में भी देखा जा रहा है। इस झड़प में भारत के कुल 20 सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद से दोनों देशों के बीच कई शांती वार्ता भी हुई पर कोई लाभदायक नतीजा नही निकल कर सामने आ सका है। इस झड़प में चीन की तरफ कितना नुकसान हुआ है इसको लेकर भी कोई आधिकारिक बयान अभी तक सामने नही आया है। भारत सरकार के इस फैसले के बाद सेना को चीनी घुसपैठ को रोकने में आसानी होगी।

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