बांग्लादेश में हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध, जानें पूरा मामला

शुक्रवार 26 मार्च 2021 को बांग्लादेश ने अपनी आजादी की 50वीं सालगिरह बनाई और इस मौके पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां मौजूद रहे। लेकिन मोदी के बांग्लादेश जाने से पहले ही कुछ लोगों ने वहां उनका विरोध शुरु कर दिया था।

Updated On: Mar 26, 2021 16:45 IST

Dastak

Photo Source- Social Media

शुक्रवार 26 मार्च 2021 को बांग्लादेश ने अपनी आजादी की 50वीं सालगिरह बनाई और इस मौके पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां मौजूद रहे। लेकिन मोदी के बांग्लादेश जाने से पहले ही कुछ लोगों ने वहां उनका विरोध शुरु कर दिया था। हालांकि इसपर बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन ने कहा कि लोगों के एक समूह के इस विरोध से चिंतित होने की कोई वजह नहीं है।

500 मुस्लमानों ने निकाली विरोध रैली-

मोमिन ने कहा कि कुछ लोग भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ढाका दौरे के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। इसमें कोई चिंता की बात नहीं है। समाचार एजेंसी एपी के अनुसार शुक्रवार को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में मुसलमानों और छात्र संगठनों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे को लेकर विरोध रैली निकाली। करीब 500 मुसलमानों ने ढाका में बैतूल मुकर्रम मस्जिद के बाहर सड़क पर मार्च किया, इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े प्रबंध किए गए थे।

मोदी विरोधी नारे लगाए गए-

प्रदर्शनकारियों के हाथों में कोई बैनर नहीं था और ना ही उन्होंने बताया कि वह किस संगठन से जुड़े हैं। यह मोदी की तस्वीर के साथ अनादर से पेश आ रहे थे, इस मार्च में भारत विरोधी और मोदी विरोधी नारे भी लगाए थे। करीब 200 स्टूडेंट कार्यकर्ताओं ने भी ढाका यूनिवर्सिटी के बाहर मार्च किया। हालांकि बांग्लादेश की आजादी का जश्न भारत के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। क्योंकि पूर्वी पाकिस्तान में शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में चलते मुक्ति संघर्ष में भारत ने भी अपनी भूमिका निभाकर दक्षिण एशियाई देशों के परिवर्तित बांग्लादेश के उदय में अपना अहम योगदान दिया था।

भारत है बांग्लादेश का बड़ा सहयोगी-

बांग्लादेश को सबसे पहले अगर किसी देश ने मान्यता दी तो वह देश भारत ही था। आगे चलकर दोनों देशों में बदलती परिस्थितियों में एक-दूसरे की उपयोगिता को समझा और संबंधों को नई दिशा प्रदान की। हालांकि दोनों देशों के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले, लेकिन आपसी कुशलता में इसका निपटारा किया गया। इसका फायदा दोनों देशों को मिला, भारत ने बांग्लादेश के सहयोग से पूर्वोत्तर के उग्रवाद के समाप्ति के साथ-साथ बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित की दूसरी ओर दक्षिण एशियाई देशों में बांग्लादेश सर्वप्रथम देश था जिसे भारत ने कोरोना काल में 90 लाख वैक्सीन निर्यात की। यह कहीं ना कहीं दोनों देश के संबंधों को बेहतर दिखा रहा है।

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