कोरोना वैक्सीन की कंपनी बदलकर दवा लेने के क्या कुछ साइड इफेक्टस हैं?

देश में इस वक्त कोरोना वैक्सीन की भारी कमी चल रही है। सरकार पर दबाव है ये पता लगाने का कि क्या दो अलग अलग वैक्सीन लगवाने पर वो कोरोना वायरस से लड़ने में सक्षम है या नहीं। इस विषय पर अध्ययन हुआ है, उसके नतीजे हम बता रहे हैं।

Updated On: May 15, 2021 19:38 IST

Dastak

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देश में इस वक्त कोरोना वैक्सीन की भारी कमी चल रही है। सरकार पर दबाव है ये पता लगाने का कि क्या दो अलग अलग वैक्सीन लगवाने पर वो कोरोना वायरस से लड़ने में सक्षम है या नहीं। हाल के एक अध्ययन के अनुसार दो प्रमुख कोरोना वायरस कीडोज को मिला देने से शुरुआती निष्कर्षों के अनुसार रोगियों को दुष्प्रभाव के रुप में थकान और सिकदर्द जैसी हल्की समस्या देखने को मिली है।

मरीजों पर दिखे हल्के साइड इफेक्ट-

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों को एस्ट्राजेनेका का टीका लगवाने के बाद उन्हें फाइजर का टीका दिया गया। उन्होंने चार सप्ताह बाद छोटे साइड इफेक्टस होने की सूचना दी। उनमें से अधिकतर पर बहुत हल्के साइड इफेक्ट थे। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ये रिसर्च दा लांसेट जनरल में छपी है।

फ्रांस में अलग कंपनी की दूसरी डोज लेना मजबूरी-

उदाहरण के तौर पर फ्रांस को लिया जाए तो वहां जिन लोगों ने पहली डोज में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन ली थी उन्हें दूसरी खुराक में फाइजर और बायोएनटेक एसई द्वारा विकसित वैक्सीन की डोज दी जा रही है। क्योंकि एस्ट्राजेनेका को वहां की सरकार ने 65 से 75 वर्ष तक के मरीजों के लिए फिक्स कर दिया है।

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इस प्रयोग से बेहतर एंटीबॉडी बनेगी या नहीं? 

इस परीक्षण को करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, "यह वास्तव में एक दिलचस्प खोज है और ऐसा कुछ दुष्प्रभाव नहीं है जिसकी हम उम्मीद कर रहे थे।" "यह प्रयोग मरीज के शरीर में बेहतर एंटीबॉडी बनाएंगे या नहीं हम अभी इस नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। कुछ हफ्तों बाद ही हमें उन परिणामों का पता चलेगा।

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