उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में मिले नरकंकाल और हड्डियां, जानें क्या है कारण

मध्यप्रदेश के उज्जेन के महाकालेश्वर मंदिर में खुदाई के दौरान नरकंकाल और हड्डियां मिली हैं। यहां मंदिर के विस्तार के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत पुरातत्व विभाग के संरक्षण में खुदाई का कार्य जारी है।

Updated On: Jul 22, 2021 18:54 IST

Dastak

Photo Source- Social Media

मध्यप्रदेश के उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में खुदाई के दौरान नरकंकाल और हड्डियां मिली हैं। यहां मंदिर के विस्तार के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत पुरातत्व विभाग के संरक्षण में खुदाई का कार्य जारी है। इससे पहले मंदिर में 11वीं शताब्दी की मूर्तियां भी मिली थी। एक्सपर्टस के अनुसार ये मुगलकालीन हो सकता है और और मंदीर के पुजारियों के अनुसार ये साधु संतों की भी हड्डियां हो सकती हैं। मई माह से ही यहां खुदाई का कार्य जारी है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार यहां जब खुदाई शुरु हुई तो उस दौरान मूतिर्या और पुरानी दिवारों के अवशेष मिले थे। ये मूर्तियां अति प्राचीन होने के चलते स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पुरातत्व विभाग को बुलवाकर ये मूर्तियां आदि उनके हवाले कर दी थी। इस घटना के बाद से मंदिर में खुदाई का कार्य भोपाल पुरातत्व विभाग की देखरेख में ही हो रहा है। इस खुदाई में जो मूर्तियां और मंदिर का ढांचा मिला है वो करीब एक हजार साल पुराना है।

मुगलकाल के दौरान का मानी जा रही हैं हड्डियां-

मूर्तियों और मंदिर के ढांचे के बाद अब मंदिर से हड्डियां भी मिली हैं, जिससे वहां काम करने वाले मजदूर सहम गए हैं और वो अब डर के साए में खुदाई के कार्य को अंजाम दे रहे हैं। वहीं इस खुदाई को मुगलकाल से भी जोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि मुगलों द्वारा मंदिरों पर जब हमले किए गए थे उस समय बडी संख्या में नरसंहार भी हुआ था। ये ढांचा और नरकंकाल उसी समय के हो सकते हैं। एक्सपर्टस की मानें तो इन हड्डियों पर परिक्षण के बाद थोड़ी सच्चाई सामने आ सकती है।

देखें इस घटना से संबंधित वीडियो-

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मंदिर में इससे पहले भी मिले थे नरकंकाल-

2012-13 के दौरान मंदिर में कुंभ मेले को लेकर टनल की खुदाई का कार्य किया गया था। उस वक्त इस जगह से तीन नरकंकाल मिले थे, लेकिन कुंभ मेले के चलते नरकंकालों की खबर छोटी पड़ गई और वो बहार नहीं आ सकी। लेकिन अब खुदाई के दौरान नरकंकाल और मंदिर के अवशेषों को पुरातत्व विभाग गंभीरता से ले रहा है। हो सकता है रिसर्च के बाद ये बात साफ हो सके कि ये सब किस काल के हैं।

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