केंद्र के आईटी नियमों के विरुद्ध देश के 13 बडे मीडिया समूहों ने खटखटाया मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा

भारत में आए नए आईटी नियमों (IT Rules India) के विरुद्ध देश के 13 बडे मीडिया समूहों (Media Groups) ने मिलकर मद्रास हाईकोर्ट (Madras HighCourt) में याचिका दाखिल की है। जिसपर कोर्ट ने सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है।

Updated On: Jun 24, 2021 11:51 IST

Dastak

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भारत में आए नए आईटी नियमों (IT Rules India) के विरुद्ध देश के 13 बडे मीडिया समूहों (Media Groups) ने मिलकर मद्रास हाईकोर्ट (Madras HighCourt) में याचिका दाखिल की है। जिसपर कोर्ट ने सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय (Ministries of Electronics and Information Technology and Information & Broadcasting) को नोटिस जारी किया है। इन मीडिया समूहों ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) के बैनर तले कोर्ट में याचिका लगा इन नए आईटी नियम (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) 2021 को चुनौती दी है। मीडिया समूहों के मुताबिक उन्हें इन नए नियमों से स्वतंत्रता का खतरा है।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मीडिया समूहों द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया है कि ये नए नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 19 (1) (ए) और 19 (1) (जी) (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पेशे के अधिकार) का उल्लंघन करते हैं। जिसपर अंतरिम आदेशों के लिए सुनवाई करते हुए, मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति की पीठ ने कहा कि ये सब याचियों के लिए उपयुक्त आधार है, कोर्ट ने आशंका जताई कि इस तरह के नियमों के तहत जबरदस्ती गलत कार्यवाही भी की जा सकती है।

आईटी काूनन के इन नियमों से मीडिया को आपत्ती-

एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कोर्ट को बताया है कि संबधित मंत्रालय द्वारा आईटी नियम के तहत उनसे 15 दिनों के अंदर सूचना देने के लिए दबाव डाला जा रहा था और 26 मई के बाद से दो बार इसके लिए रिमांइडर भी दिए जा चुके हैं। मीडिया समूहों को आपत्ती आईटी एक्ट के नियम 16 से है। जो सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के सचिव को मनमानी शक्तियां प्रदान करता है। जिसमें सुनवाई के बिना ही खबर को ब्लॉक करने के लिए उन्हें शक्तियां प्रदान करता है। लेकिन इसपर सरकार का कहना है कि वो ऐसा कर डिजिटल मीडिया के गलत प्रयोग को रोकना चाहते हैं।

एसोसिएशन ने आईटी नियम के 12,14 और 16 पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इसका नियम 14 कहता है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के साथ एक अंतर-विभागीय समिति का गठन करेगा। याचियों ने कोर्ट को इन नियमों पर तुरंत रोक लगाने का आदेश देने की बात कही। जिसपर कोर्ट ने कहा कि सरकार ने अभी इन नियमों का तहत किसी भी याचिकाकर्ता के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की है। अगर सरकार ऐसा करती है तो हम याचियों को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता देते हैं। कोर्ट ने संबधित मंत्रालय को एक पखवाडे के अंदर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है और इस सुनवाई को तीन हफ्तों के लिए टाल दिया है।

नए नियमों के बारे में क्या सोचते हैं मीडिया संगठन-

एसोसिएशन के मुताबिक नए नियम मीडिया संस्थानों को कानून के दायरे में लाते हैं। वे भारत के परंपरिक और पुराने मीडिया संगठनों पर भी अति नियंत्रण का बोझ थोपते हैं। वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए बोलने की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वंतत्रता पर अंकुश लगाने की कोशिश करते हैं। ये नियम भय और निगरानी के नए युग में लेकर जाने की संभावनाओं से भरे हैं।

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ये मीडिया हाउस हैं याचिकाकर्ता-

डीएनपीए में शामिल मीडिया हाउसों ने मिलकर इस सगंठन के तहत याचिका मद्रास हाईकोर्ट में लगाई है। जिसमें एबीपी नेटवर्क, अमर उजाला, दैनिक भास्कर कॉर्प, एक्सप्रेस नेटवर्क, एचटी डिजिटल स्ट्रीम, आईई ऑनलाइन मीडिया सर्विसेज (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप का हिस्सा), जागरण प्रकाशन, लोकमत मीडिया, एनडीटीवी कन्वर्जेंस, टीवी टुडे नेटवर्क, मलयाला मनोरमा, टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड और उषोदय एंटरप्राइजेज। मुकुंद पद्मनाभन, द हिंदू और द हिंदू बिजनेस लाइन के पूर्व संपादक, डीएनपीए के साथ सह-याचिकाकर्ता हैं।

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