अजय माकन ने 48,000 झुग्गियों को गिराने से पहले की पुर्नवास की मांग, पहुंचे कोर्ट

अजय माकन ने दायर याचिका में कहा कि शीर्ष अदालत का आदेश है कि कोई भी अदालत 48,000 झुग्गियों को हटाने पर रोक लगाने का निर्देश न दे, जो कि न्याय तक पहुंच स्थापित करने के अधिकार में बाधा उत्पन्न करता है।

Updated On: Sep 11, 2020 17:50 IST

Dastak Web Team

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रेलवे के किनारे झुग्गियां गिराने को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन कोर्ट में झुग्गियों गिराने से पहले पुर्नवास की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को रेलवे की पटरियों के किनारे बनी झुग्गी बस्ती को गिराने का आदेश दिया था। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को तीन महीनो का टाइम दिया था। रेलवे की पटरियों के पास करीब 48,000 झुग्गियां हैं। कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा था कि इस मामले में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप न हो।

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माकन ने अपनी याचिका में कहा कि रेल मंत्रालय और दिल्ली सरकार ने पहले ही प्रक्रिया की पहचान करने और झुग्गियों को हटाने की पहल की है। और दिल्ली में विभिन्न मलिन बस्तियों के लिए विध्वंसकारी नोटिस जारी किया है। माकन ने आगे कहा, कि ऐसा करते हुए उन्होंने झुग्गियों को हटाने या ढहाने के लिए दिल्ली स्लम और जेजे पुर्नवास नीति 2015की अनदेखी की घई है।

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लोगों का बेघर होना कोविड के समय खतरनाक साबित होगा: माकन

कोर्ट के आदेश पर माकन का कहना है, कि अगर झुग्गियों के बड़े पैमाने पर विध्वंस की कार्रवाई जारी रहती है। तो इससे लाखों लोगों के प्रभावित होने और कोविड-19 के बीच बेघर होने की संभावना है। अपनी याचिका में माकन ने बताया, बेघर व्यक्ति का आश्रय और अजीविका की तलाश में एक स्थान पर जाने के लिए मजबूर हो जाएंगे। और वर्तमान में चल रहे कोविड संकट के समय यह काफी ज्यादा हानिकारक होगा।

याचिका में दलील दी गई है कि 31 अगस्त के आदेश को पारित करते समय शीर्ष अदालत ने सरकारी एजेंसियों को लिए एक विस्तृत सुनवाई की थी। मगर अदालत ने झुग्गीवासियों की प्रभावित आबादी को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। उन्हें सुनवाई के अवसर से भी वंचित रखा गया।

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