सरकार बोली: बिहार के मजदूरों को पंजाब में दिए जाते हैं ड्रग्स, किसानों ने किया विरोध

भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अनुसार बीएसएफ ने साल 2019-20 के दौरान पंजाब के बॉर्डर जिलों से ऐसे 58 मजदूरों को पकड़ा था जिन्हें ड्रग्स दिए गए थे। लेकिन इस खत पर तीन कृषि कानूनों के खिलाफ धरने पर बैठे किसान संगठनों ने सरकार को तीखी प्रतिक्रिया दी है।

Updated On: Apr 3, 2021 09:20 IST

Dastak

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Source: Google)

केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार को एक खत के जरिए मजदूरों को ड्रग्स देकर अधिक घंटे उनसे काम लेने के मामले में कार्यवाही करने के आदेश दिए हैं। बीएसएफ ने एक मामले में जानकारी दी थी कि बिहार और पूर्वी उत्तरप्रदेश से पंजाब में काम करने के लिए लाए गए प्रवासी मजदूरों से अधिक समय काम लेने के लिए उन्हें ड्रग्स का सेवन कराया जा रहा है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक केंद्र ने ये खत 17 मार्च को पंजाब सरकार के चीफ सेकेट्री और डीजीपी के नाम भेजा था।

किसान संगठनों और राजनैतिक दलों ने किया विरोध-

भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अनुसार बीएसएफ ने साल 2019-20 के दौरान पंजाब के बॉर्डर जिलों से ऐसे 58 मजदूरों को पकड़ा था जिन्हें ड्रग्स दिए गए थे। लेकिन इस खत पर तीन कृषि कानूनों के खिलाफ धरने पर बैठे किसान संगठनों ने सरकार को तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय किसान यूनियन (दकोंदा) के जनरल सेक्रेट्री जगमोहन सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।

मीडिया के अनुसार पंजाब के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने केंद्र से इस संबध में खत मिलने की बात को स्वीकारा है और कहा है कि यह अब जांच का विषय है, उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। भाजपा के पूर्व सहयोगी दल शिरोमणी अकाली दल ने केंद्र के इस खत को हास्यास्पद और किसानों को बदनाम करने की साजिश करार दिया है।

भारत सरकार ने क्या कहा है?

बीएसएफ द्वारा गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और अबोहर के सीमावर्ती इलाकों से 58 लोगों को "गिरफ्तार" करने का जिक्र करते हुए, केंद्र द्वारा भेजे गए खत में लिखा गया है कि "पूछताछ के दौरान इन मजदूरों से, यह उभर कर सामने आया है कि उनमें से ज्यादातर या तो मानसिक रूप से विकलांग थे और ये पंजाब के सीमावर्ती गांवों में किसानों के साथ बंधुआ मजदूर के रूप में वहां काम कर रहे थे। ये व्यक्ति गरीब परिवार की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं और बिहार और उत्तर प्रदेश के दूरदराज के इलाकों से आते हैं। ”

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भारत सरकार ने इसे लेकर मानव तस्करी के मुद्दे को भी उठाया है। पत्र में कहा गया है कि मानव तस्करी का सिंडिकेट ऐसे मजदूरों को उनके मूल स्थान से पंजाब में काम करने के लिए अच्छे वेतन के वादे पर काम पर लगाते हैं, लेकिन पंजाब पहुंचने के बाद उनका शोषण किया जाता है, उनको सही तरीके से भुगतान नहीं किया जाता और उनके साथ अमानवीय व्यवहार भी किया जाता है। वे खेतों में लंबे समय तक काम कर सके इसके लिए, इन मजदूरों को अक्सर दवाएं दी जाती हैं, जो उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। बीएसएफ आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए बचाए गए लोगों को राज्य पुलिस को सौंप रहा है। ”

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