थरूर को लेकर फूटी कांग्रेस, नेता बोले थरूर को बाहर नहीं रख सकते

राज्य की राजनीति में तिरुवनंतपुरम के सांसद के आने से मंथन शुरू होने की संभावना है। शशि थरूर के उत्तरी केरल पहुंचने से सोमवार को पार्टी का हिलना जारी रहा। पार्टी के राज्य अध्यक्ष ने नेताओं को निर्देश दिया कि ऐसे सार्वजनिक बयान ना दें।

Updated On: Nov 22, 2022 19:06 IST

Dastak Web Team

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जूली चौरसिया

राज्य की राजनीति में तिरुवनंतपुरम के सांसद के आने से मंथन शुरू होने की संभावना है। शशि थरूर के उत्तरी केरल पहुंचने से सोमवार को पार्टी का हिलना जारी रहा। पार्टी के राज्य अध्यक्ष ने नेताओं को निर्देश दिया कि ऐसे सार्वजनिक बयान ना दें , जो पार्टी की एकता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। चाहे राज्य इकाई में तिरुवनंतपुरम के सांसद के समर्थक इस बात की आलोचना करते रहे की चीजें कैसे बदल गई। कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है, जो आंतरिक लोकतंत्र सुनिश्चित करती है। पार्टी की एकता को बनाए रखने के लिए सार्वजनिक बयानों से बचना चाहिए थरूर कांग्रेस के बड़े नेता है।

उन्हें जिला कांग्रेस समितियों की सलाह से आधिकारिक कामों में भाग लेने की स्वतंत्रता है। नेताओं के सांगठनिक काम में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए , थरूर से संबंधित मुद्दों पर पार्टी बहस करेगी"। थरूर द्वारा सुर्खियां बटोरने के बाद सुधारक कि अपने पार्टी सहयोगियों से अपील केरल में अपना चार दिवसीय दौरा शुरू करने के एक दिन बाद आई है।

पार्टी के दबाव के बाद यूथ कांग्रेस ने रविवार को कोझीकोड में एक कार्यक्रम से हाथ खींच लिया, जहां पर सांसद के संघ परिवार और धर्मनिरपेक्ष की चुनौतियों के बारे में बात करनी थी। थरूर ने शुरुआत में कहा कि वह इस कार्यक्रम को खेल की भावना से देख रहे थे। परंतु बाद में उन्होंने यूथ कांग्रेस की पार्टी की जांच की मांग की जिसमें उनकी बात की मेजबानी करने की अनुमति नहीं दी गई थी। पार्टी के कोझिकोड जिला अध्यक्ष प्रवीण कुमार के बयान से सुधारक का बयान बिल्कुल विपरीत था। जिसमें अध्यक्ष ने दावा किया था , कि थरूर को कार्यक्रम स्थल से वंचित कर दिया गया था। क्योंकि बातचीत को " गुटीय गतिविधि" माना गया था।

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कोझिकोड के सांसद एमके राघवन ने रविवार को पार्टी में थरूर के विरोधियों को एक कड़ा संदेश भेजते हुए कहा जिन लोगों ने वाईसी को थरूर की मेजबानी करने से मना कर दिया है। उन्हें याद रखना चाहिए कि ज़हर अमलतास को काटकर खत्म नहीं किया जा सकता। सोमवार को केपीसीसी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद के मुरलीधरन ने विवाद में एक नया मोड़ जोड़ दिया और कहा कि पार्टी के कुछ नेताओं ने थरूर को एक खतरे के रूप में देखा। उन्होंने किसी का नाम ना लेते हुए कहा इसके पीछे मुख्यमंत्री पद पर नजर रखने वालों का हाथ हैं। मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता, परंतु थरूर पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए था।

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