नकली रेमेडिसविर कंपनी का भांडाफोड, दिल्ली में सोशल मीडिया पोस्ट डाल बेच चुके हैं 2000 इंजेक्शन

कोविड19 के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा रेमेडिसविर (Remdesivir) की नकली फैक्ट्री मिली है। उत्तराखंड के कोटद्वार (Kotdwar in Uttrakhand) में एक ’फार्मास्यूटिकल’ यूनिट का पता लगा जो नकली रेमेडिसविर इंजेक्शन (Fake Remdesivir) का निर्माण कर रही थी।

Updated On: Apr 30, 2021 18:42 IST

Dastak

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Source: Pixabay)

कोविड19 के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा रेमेडिसविर (Remdesivir) की कालाबजारी की खबरें तो आ रही थी लेकिन अब इसकी एक नकली फैक्ट्री भी पकड़ी गई है। उत्तराखंड के कोटद्वार (Kotdwar in Uttrakhand) में क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट-सेल ने एक ’फार्मास्यूटिकल’ यूनिट का पता लगाया है जो नकली रेमेडिसविर इंजेक्शन (Fake Remdesivir) का निर्माण कर रही थी। इस मामले में पुलिस ने एक महिला सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है और पाया है कि वे अब तक 2000 इंजेक्शन बेच चुके थे।

दिल्ली के पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने एक वीडियो ट्वीट किया, जिसमें कहा गया है: “महत्वपूर्ण जानकारी पर काम कर रही दिल्ली पुलिस ने एक लंबी जांच में पांच दोषियों को गिरफ्तार किया और उत्तराखंड के कोठद्वार में एक 'दवा’ इकाई का पता लगाया, जो बड़ी मात्रा में नकली रेमेडिसविर इंजेक्शन (COVIPRI) का निर्माण कर रही थी।

ये नकली दवा कंपनी 25 हजार से अधिक कीमत पर इस नकली इंजेक्शन को बेच रही थी। छापे के दौरान कंपनी परिसर से 196 नकली रेमेडिसविर, पैकिंग मशीन, 3000 खाली दवा की शीशीयां बरामद की गई। आरोपियों ने बताया कि बाजार में वो दो हजार से अधिक नकली रेमेडिसविर इंजेक्शन बेच चुके हैं।

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दिल्ली में पिछले हफ्ते एसीपी संदीप लांबा के नेतृत्व में एक टीम ने बत्रा सिनेमा के बाहर से दो लोगों मोहम्मद शोएब और मोहन झा को गिरफ्तार किया था। ये दोनों यहां इंजेक्शन देने के बाद उसका बचा पैसा इकट्ठा करने आए थे। जांच के दौरान पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में पता चला और दिल्ली से दो और व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने छापेमारी कर रुड़की से एक वतन कुमार सैनी नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया। वो एक ड्रग निर्माण इकाई चला रहा था और उसकी इकाई को पहले ही उत्तराखंड के ड्रग विभाग द्वारा सील कर दिया गया था।

दिल्ली पुलिस ने मीडिया को बताया कि हमें तब पता तला कि कोरोना रोगियों के उपचार में आने वाली इस दवा को स्पलाई करने वालों का पूरा एक सिंडिकेट है। इनमें से दो आरोपी दवा के प्रतिनिधी के रुप में काम करते हैं और नकली दवा प्राप्त करने के बाद वे सोशल मीडिया पर अपना नंबर प्रसारित करते हैं। ग्राहक मिलने के बाद वे इसे 25 हजार से 40 हजार रुपयों के बीच बेचते हैं।

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