फाइटर पायलट अभिनव की मौत पर पिता सतेंद्र चौधरी ने की सेना से मिग-21 विमान हटाने की मांग

पायलट अभिनव के पिता सतेंद्र चौधरी ने रोते हुए भारत सरकार से अपील की है कि वो मिग-21 लड़ाकू विमानों को भारतीय वायुसेना से तुरंत बाहर कर दें, ताकि अन्य परिवारों को ऐसी अपूरणीय क्षति न हो।

Updated On: May 22, 2021 13:08 IST

Ajay Chaudhary

Photo Source- Social Media

पंजाब के मोगा में शुक्रवार को भारतीय वायुसेना के मिग-21 विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने में उसके पायलट अभिनव चौधरी की मौत हो जाती है। जिसपर मेरठ की गंगासागर कॉलोनी में रहने वाले अभिनव के पिता सतेंद्र चौधरी सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने रोते हुए भारत सरकार से अपील की है कि वो मिग-21 लड़ाकू विमानों को भारतीय वायुसेना से तुरंत बाहर कर दें, ताकि अन्य परिवारों को ऐसी अपूरणीय क्षति न हो।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जैसे ही पंजाब के मोगा में मिग-21 बाइसन फाइटर एयरक्राफट के क्रैश होने में अभिनव चौधरी की मौत की खबर आती है वैसे ही मेरठ स्थित अभिनव के घर पर उनके जानने वाले लोगों का शोककुल परिवार को संत्पत देने के लिए हुजूम उमड़ पड़ा।

अभिनव चौधरी के पिता सतेंद्र चौधरी ने कहा कि भारतीय वायुसेना में नए ज्वाइन किए पायलटों को अभी भी सबसे पुराने फाइटर एयरक्राफट से ट्रेनिग दी जा रही है। इतिहास में इन जहाजों में उड़ान के दौरान खराबी आने के बाद कई लडाकू पायलटों को खोने की खबरे हैं। ये हमारे लडाकू पायलटों की जान को लेकर गंभीर विषय है। जिसपर मैं सरकार से अपील करता हूं कि इन दुर्घटना संभावित एरयक्राफटों को वायुसेना को उड़ाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

अभिनव के परिवार का पुश्तैनी घर बागपत के पुशार गांव में है। लेकिन उनके पिता वर्षों पहले मेरठ बेस में जाकर बस गए थे। अभिनव ने अपनी प्रारंभिव शिक्षा भी मेरठ में ही ली है। उसके बाद उसने बाद की शिक्षा भारतीस सैन्य कॉलेज देहरादून से ली। अभिनव ने 2014 में भारतीय एयरफोर्स ज्वाइन की। उसकी पहली पोस्टिंग पठानकोट एयरबेस पर रही। अभिनव का विवाह 25 दिसंबर 2019 को सोनिका उज्जवल के साथ हुआ। जिसने फ्रांस के एक इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री ली है।

अभिनव के चचेरे भाई डॉ अंजुम ने भी मीडिया से कहा कि हर साल हमारे कई लड़ाकू पायलट इन उड़ते ताबूतों की दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। इन्हें 1980 में रुसी सेना द्वारा त्याग दिया गया था। फिर भी हमारी सरकार इन पुराने जहाजों को भारतीय वायुसेना से निकालने के निर्णय पर देरी कर रही है।

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परिवार के पडोस में रहने वाले रिटायर कैप्टन ज्ञान सिंह ने कहा कि सरकार फाइटर पायलटों की ट्रैनिंग पर करोड़ो खर्च करती है। फिर इन्हें खराब हो चुके वाहनों को चलाने की अनुमति क्यों दी जाती है।

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