पंजाब से टिकरी: 300 km की यात्रा करके विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पहुंची स्कूली छात्राएं

कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन पिछले एक महीने से जारी है। मंगलवार को आंदोलन का 34वां दिन है। दिल्ली की तीन सीमाओं पर डटे किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

Updated On: Dec 29, 2020 14:30 IST

Dastak Web 1

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कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन पिछले एक महीने से जारी है। मंगलवार को आंदोलन का 34वां दिन है। दिल्ली की तीन सीमाओं पर डटे किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। अभी भी हरियाणा और पंजाब से किसानों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। इस बीच पंजाब के किशनगढ़ के होली हार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल की लगभग 50 स्कूली छात्राओं ने 300 किलोमीटर की यात्रा की, और विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन देने के लिए सोमवार को टिकरी बॉर्डर पर किसानों से जुड़ीं। अपनी यूनिफॉर्म पहने ये छात्राएं ज्यादातर ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा की हैं। इन्होने दोपहर में मार्च का मंचन किया और ‘किसान एकता जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए।

हम अन्य किसानों की तरह ट्रैक्टर और ट्रॉलियों में रहेंगे

स्कूल की प्रबंध निदेशक रनजीत कौर ने कहा कि छात्राएं यहां कम से कम दो-तीन दिनों के लिए रुकेंगी। जिसके बाद यहां अन्य बैच के स्टूडेंट्स आएंगे। हम अन्य किसानों की तरह ट्रैक्टर और ट्रॉलियों में रहेंगे। हम ऐसे कुछ लोगों को जानते हैं जिन्होंने हमारे लिए व्यवस्था की है। उन्होने कहा कि ये उन किसानों के बच्चे हैं जो अपने माता-पिता द्वारा विरोध स्थल पर भेजे गए है। जो वित्तीय या स्वास्थ्य कारणों से यहां नहीं आ सके। रनजीत कौर ने कहा स्कूल में लगभग 600 से अधिक स्टूडेंट्स हैं। लड़के भी सार्वजनिक परिवहन और अन्य साधनों के माध्यम से बाद में यहां आएंगे। हम लड़कियों को एक बस में ले आए। इसके अलावा कुछ छात्र पहले भी राज्य में विरोध का हिस्सा थे।

इससे किसानों की कीमत पर निजी कंपनियों को फायदा होगा

ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा अश्दीप कौर ने कहा कि उसका परिवार बिलों के खिलाफ है। क्योंकि इससे किसानों की कीमत पर निजी कंपनियों को फायदा होगा और मंडी व्यवस्था खत्म होगी। एक अन्य छात्रा जसप्रीत कौर जो कि बारहवीं कक्षा की छात्रा है। उनके पिता बीमार हैं इस कारण उन्होने यहां आने का फैसला किया। और कहा जब तक कानून को रद्द नहीं किया जाता हम यहीं रहेंगे।

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जब उनसे पूछा गया कि क्या विरोध में शामिल होने से उनकी पढ़ाई बाधित होगी। तो उन्होंने कहा किसानों के लिए यहां रहना अधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि किसान सभी को भोजन देते हैं। गुरप्रीत सिंह जिनकी बेटी गुरमीत कौर विरोध करने आई टीम का हिस्सा है। उन्होने फोन पर बात करते हुए कहा मेरे एक रिश्तेदार बहुत बीमार हैं। और उन्हें खून की ज़रूरत है। इसलिए मैं नही आ सका। मैं चाहता था कि मेरा बच्चा मेरी आवाज़ बने। और सरकार को बताए कि पूरे क्षेत्र के किसान इस काले कानून के खिलाफ हैं।

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