चीन को लगने वाला है ये बड़ा झटका, भारत सरकार ने शुरू की तैयारी

चीन अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहा। तो यहां भारत सरकार भी हर क्षेत्र से चीन की जड़े उखाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। चीन के ऐप्स बैन करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान चलाया, जिसके तहत अब खिलौनों के बाजार से भी चीन का सूपड़ा साफ करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

Updated On: Sep 10, 2020 18:09 IST

Dastak Web Team

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चीन और भारत के बीच का विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। बॉर्डर पर चीन अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहा है। तो यहां भारत सरकार भी हर क्षेत्र से चीन की जड़े उखाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। चीन के ऐप्स बैन करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान चलाया, जिसके तहत अब खिलौनों के बाजार से भी चीन का सूपड़ा साफ करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

चीन को झांसी से मिलेगा करारा जवाब-

जंगे आजादी में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाली रानी लक्ष्मी बाई की धरती झांसी में साफ्ट ट्वाय के उत्पादन में चीन की पछाड़ने के लिए इस उधोग की बेहत्तरी के लिए काम शुरू हो चुका है। इस तरह के उत्पाद झांसी की खासियत हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित आत्म निर्भर भारत पैकेज की घोषणा के बाद उनके वोकल फॉर लोकल के सपने को साकार करने के लिए मई में मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित पहले मेगा ऑनलाइन लोन मेले इसी उद्योग से जुड़ी झांसी की उदिता गुप्ता को कारोबार के विस्तार के लिए 50 लाख रुपये का चेक भी दिया गया। प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात में खिलौना उद्योग की चर्चा करने के बाद इसमें और तेजी आना तय है। और चीन का प्रभुत्व खिलौना बाजार से भी खत्म हो जाएगा।

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ओडिओपी के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाना चाहती है सरकार-

सरकार चाहती है कि ओडीओपी के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया जाए। इसमें एक ही छत के नीचे डिजाइन स्टूडियो, गुणवत्ता जांचने के लिए, लैब रिर्सच एंड डेवलेपमेंट सेंटर होगा। इसके अलावा इस उद्योग से जुड़े लोगों की उत्पादन क्षमता बढ़े, तैयार माल की फिनिशिंग बेहतर हो और वे गुणवत्ता और दाम में प्रतिस्पर्धी हों, इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए उनको लेजर कटिंग मशीन, कंप्रेसर, कारडिंग फर को संवारने मशीन और आटोमेटिक टेलरिंग मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी।

गौरतलब हो कि झांसी अपने साट ट्वायज के लिए जाना जाता है। अधिकांश खिलौने दीनदयाल नगर में बनते हैं। खिलौने बनने के बाद बची चीजों से बच्चों के जूते और अन्य छोटे सामान बनते हैं।

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