ब्लैक फंगस की पहचान कैसे करें? इस बीमारी को लेकर राहुल गांधी ने साधा पीएम पर निशाना

ब्लैक फंगस वातावरण में कहीं भी रह सकता है और इंफेक्शन शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। फंगस जमीन पर, सडने वाले ऑर्गेनिक पदार्थों में भी पाया जा सकता है, इसके अलावा कोरोना से ठीक हुए लोगों में भी ब्लैक फंगस का इन्फेक्शन मिल रहा है।

Updated On: May 22, 2021 18:18 IST

Dastak

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नाजिश खान

देश के 10 राज्यों में ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया गया है। यह कोई नई बीमारी नहीं है लेकिन फिलहाल यह कोरोना के मरीजों में ज्यादा दिख रही है। इस बीमारी से डायबिटीज के मरीज को ज्यादा खतरा है। वहीं राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर सीधा निशाना साधकर कहा है कि नई महामारी की दवा की भी भारी कमी है। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा मोदी सिस्टम के कुशासन के चलते सिर्फ़ भारत में कोरोना के साथ-साथ ब्लैक फ़ंगस महामारी है। वैक्सीन की कमी तो है ही, इस नयी महामारी की दवा की भी भारी कमी है। इससे जूझने के लिए PM ताली-थाली बजाने की घोषणा करते ही होंगे।

दिल्ली में ब्लैक फंगस का कितना असर-

दिल्ली में अब तक लगभग 200 केस ब्लैक फंगस के पाए गए हैं और इससे संबधित 5 मौतें भी हो चुकी हैं। दिल्ली में इस बीमारी के इलाज के लिए तीन अस्पतालों को नोटिफाई किया गया है। दिल्ली सरकार ने एलएनजेपी, जीटीबी और जेबी पंत और वही केंद्र सरकार के अस्पताल एम्स, आरएमएल और सफदरजंग में भी अलग से बॉर्ड बनाया गया है। लगातार राज्य सरकार केंद्र सरकार से अपील कर रही है कि एम्फोटेरिसिन इंजेक्शन की कमी पूरी की जाए और कड़े कदम उठाए जाएं, क्योंकि इंजेक्शन की कमी की किल्लत से भारी नुकसान हो सकता है।

महाराष्ट्र ने दिए दवा कंपनी को दो लाख इंजेक्शन के ऑर्डर-

वहीं दूसरी ओर मुंबई में कोरोना के साथ ब्लैक फंगस के भी सबसे ज्यादा केस देखने को मिले हैं। मुंबई में लगभग दो हजार ब्लैक फंगस के मामले सामने आए हैं और इस बीमारी के इंजेक्शन और दवा की भारी कमी भी है। राज्य सरकार ने दो लाख इंजेक्शन के ऑर्डर दवा कंपनी को दिए हैं लेकिन जबतक केंद्र सरकार कंपनी को निर्देश नहीं देती तबतक उनका उत्पादन शुरु नहीं हो पाएगा।

आईसीएमआर ने इस बीमारी से संबधित दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। जिससे लोगों को इस बीमारी को पहचानने में मदद मिल सके और वो जल्द से जल्द डाक्टर से संपर्क कर सके। अगर ब्लैक फंगस के सिम्टमस की पहचान जल्दी कर ली जाए तो मरीज डाक्टर के संपर्क में भी जल्दी आएगा। शुरुआती दौर में इस बीमारी को दवा से भी ठीक किया जा सकता है।

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कैसे करें ब्लैक फंगस की पहचान-

ब्लैक फंगस वातावरण में कहीं भी रह सकता है और इंफेक्शन शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। फंगस जमीन पर, सडने वाले ऑर्गेनिक पदार्थों में भी पाया जा सकता है, इसके अलावा कोरोना से ठीक हुए लोगों में भी ब्लैक फंगस का इन्फेक्शन मिल रहा है। ब्लैक फंग्स की पहचान है आंखों में दर्द होना, आंखों में सूजन आना, चेहरे के एक तरफ का सूज जाना, सिर में दर्द होना, नाक बंद हो जाना, उल्टी होना, बुखार आना, सीने में दर्द होना, मुंह के ऊपरी हिस्से या नाक में काले घाव नज़र आन है। इस तरह के सिम्टम्स होने पर जल्द ही डॉक्टर से संपर्क करें।

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