16 साल में पहली बार विदेशी सहायता स्वीकार कर रहा भारत, मनमोहन सिंह ने की थी आत्मनिर्भरता की बात

भारत 16 सालों में पहली बार विदेशी सहायता स्वीकार कर रहा है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकारें जीवन रक्षक उपकरणों और दवाओं को विदेशी एजेंसियों से खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं, और केंद्र सरकार इसकी खिलाफत नहीं करेगी।

Updated On: Apr 29, 2021 10:59 IST

Dastak

Photo Source- MEA

भारत 16 सालों में पहली बार विदेशी सहायता स्वीकार कर रहा है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकारें जीवन रक्षक उपकरणों और दवाओं को विदेशी एजेंसियों से खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं, और केंद्र सरकार इसकी खिलाफत नहीं करेगी। अब जरुरत पड़ने पर भारत चीन से भी मेडिकल उपकरण खरीदने पर विचार कर रहा है। पाकिस्तान ने भी भारत की मदद की पेशकश की है लेकिन भारत ने पाकिस्तान को अभी तक कोई भी जवाब नहीं दिया है।

मनमोहन सरकार ने किया था विदेशी सहायता न लेने का फैसला-

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक भारत ने अपनी आत्मनिर्भर और उभरती शक्ति की छवि को देखते हुए 16 साल पहले यूपीए की मनमोहन सरकार ने एक बदलाव किया था जिसके मुताबिक विदेशी सहायता न लेने का फैसला लिया गया था। उससे पहले भारत ने विदेशी सरकारों से उत्तरकाशी भूकंप (1991), लातूर भूकंप (1993), गुजरात भूकंप (2001), बंगाल चक्रवात (2002) और बिहार बाढ़ (जुलाई 2004) में सहायता स्वीकार कर ली थी।

दिसंबर 2004 की सुनामी के बाद उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि "हमें लगता है कि हम अपने दम पर स्थिति का सामना कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर हम उनकी मदद लेंगे।" यह भारत की आपदा सहायता नीति के लिए एक एक एतिहासिक पल था। इसने नीति निर्धारित की और पिछले 16 वर्षों में भारत ने कोई विदेशी मदद नहीं ली। भारत ने 2013 में उत्तराखंड बाढ़, 2005 में कश्मीर भूकंप और 2014 में कश्मीर बाढ़ में भी विदेशी सहायता से इनकार कर दिया।

मोदी सरकार ने केरल को यूएई से मदद नहीं लेने दी थी-

हाल ही में अगस्त 2018 में जब केरल में बाढ़ आई तो राज्य सरकार ने केंद्र को कहा कि यूएई ने बाढ़ राहत के रूप में 700 करोड़ रुपये की पेशकश की है तो केंद्र ने कहा था कि हम किसी भी अंतर्राष्ट्रीय सहायता को स्वीकार नहीं करेंगे। केंद्र ने उस वक्त सपष्ट किया था कि वो राज्य की जरुरतों को घरेलू रुप से पूरा करने में सक्षम है।

ये देश आए हैं भारत की मदद के लिए आगे-

अब तक 20 से अधिक देश भारत की मदद के लिए आगे आए हैं जिसमें पड़ोसियों से लेकर विश्व की प्रमुख शक्तियों तक शामिल हैं। भूटान भारत को ऑक्सीजन की आपूर्ति करेगा, अमेरिका अगले महीने से एस्ट्राजेनेका के टीके को साझा कर सकता है। समर्थन भेजने वाले देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, आयरलैंड, बेल्जियम, रोमानिया, लक्समबर्ग, पुर्तगाल, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, भूटान, सिंगापुर, सऊदी अरब, हांगकांग, थाईलैंड, फिनलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे इटली और यूएई शामिल हैं।

अखबार के मुताबिक भारत ने पिछले साल ही इस बदलाव का संकेत दे दिया था। जब पीएम केयर फंड के लिए भारत ने विदेशी सहयोग को स्वीकार करने का फैसला किया था।

अमेरिका भारत की 100 मिलियन यूएस डॉलर की मदद करेगा-

अमेरिका भी आने वाले दिनों में भारत को 100 मिलियन यूएस डॉलर की मदद करेगा। अमेरिका ने जानकारी दी है कि भारत की मदद के लिए पहली फ्लाइट उड़ान भर चुकी है। फ्लाइट में 440 ऑक्सीजन सिलेंडर और रेगुलेटर के साथ अन्य मेडिकल उपकरण शामिल हैं। जो केलिफोनिर्या राज्य ने दान किए हैं।

इसके अलावा, इस पहली उड़ान में, यूएसएआईडी 960,000 रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट भेज रहा है। ताकि संक्रमण का पता जल्दी चल सके और उसे रोकने में मदद मिले। भारत के फ्रंटलाइन हेल्थकेयर वर्करों की सुरक्षा के लिए एक लाख एन 95 मास्क भी भेजे जा रहे हैं।

मुश्किल समय में भारत के साथ खडा है अमेरिका-

व्हाइट हाउस ने भारत को तत्काल मदद मुहैया कराते हुए कहा है कि अमेरिका मुश्किल के समय में भारत के साथ खड़ा है। ये हमारी एकजुटता को दर्शाता है। हम भारत को ऑक्सीजन सपोर्ट, ऑक्सीजन कंस्टेरेटरस, ऑक्सीजन जनरेशन यूनिट, पीपीई किट, वैक्सीन बनाने संबधि रॉ मेटेरियल की स्पलाई और रैपिड टेस्ट किट दे रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने कहा कि उसने जो 1,100 ऑक्सीजन सिलिंडर भारत को दिए हैं वो भारत में ही रहेंगे और उन्हें वहां के लॉकल सेंटरों पर फिर से रिफिल किया जा सकेगा। अमेरिका भारत को ऑक्सीजन जेनरेशन यूनिट्स (PSA Systems) भी प्रदान कर रहा है।अमेरिका जल्द ही मरीजों और स्वास्थय कर्मियों दोनों के लिए ही 15 मिलियन से अधिक एन 95 मास्क भारत को देगा।

बिडेन ने बदला भारत के लिए वैक्सीन के लिए आदेश-

बिडेन प्रशासन ने भारत को एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के निर्माण के लिए जरुरी सामान देने के आदेश को फिर से बदला है। व्हाइट हाउस ने कहा कि इससे भारत को COVID-19 टीकों की 20 मिलियन से अधिक खुराक बनाने की अनुमति मिलेगी। पिछले दिनों अमेरिका ने भारत को वैक्सीन बनाने के लिए जरुरी समान देने पर रोक लगा दी थी।

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व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक फैक्ट शीट के अनुसार, अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज करने में मदद करने के लिए अमेरिका एंटीवायरल ड्रग रेमेडिवियर के 20,000 खुराक भारत को देगा।

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