भारत-चीन सैनिकों के बीच हुआ युद्ध! लेकिन देश से छुपाया गया?

भारत -चीन के बीच यह फायरिंग किसी भी चेतावनी भरी फायरिंग से कहीं ज्यादा थी। मास्को में केन्द्रीय मंत्रियों की वार्ता से ठीक तीन दिन पहले 7 तारीख को पैंगॉग त्सो झील चुशुल सब सेक्टर में दोनों ओर जोरदार गोलीबारी के बयान जारी किये गए।

Updated On: Sep 16, 2020 13:11 IST

Dastak Web Team

Photo Source: Social media

कई महीनों से लगातार चीन और भारतीय बॉर्डर से कई तरह की खबरें आ रहीं हैं। कभी खबर आती है, कि तनाव काफी बढ़ गया है। कभी खबर आती है, कि वार्ता के बाद सब ठीक हो सकता है। लेकिन अब मीडिया रिपोर्ट की माने तो लद्धाख में पैंगोंग त्सों झील के उत्तरी क्षेत्र में मास्को वार्ता से 3 दिन पहले दोनों सेनाओं की ओर से 100 से 200 राउंड फायरिंग की गई।

यह फायरिंग किसी भी चेतावनी भरी फायरिंग से कहीं ज्यादा थी। मास्को में केन्द्रीय मंत्रियों की वार्ता से ठीक तीन दिन पहले 7 तारीख को पैंगॉग त्सो झील चुशुल सब सेक्टर में दोनों ओर जोरदार गोलीबारी के बयान जारी किये गए।

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एलएसी(LAC) पर 45 वर्षों में पहली बार हुई फायरिंग

एक सरकारी अधिकारी का कहना है, कि एलएसी पर 45 वर्षों में पहली बार फायरिंग हुई है। वो भी इतने बड़े पैमाने पर अधिकारी ने बताया कि 29-30 तारीख के बाद भारतीय सेना ने उसी सप्ताह पहले से खाली स्थान पर उंची पहाड़ियों पर कब्जा जमाने के लिए युद्धभ्यास शुरू कर दिया। इसका फायदा भी भारतीय सेना को मिला। चीन लगातार इस कोशिश में लगा रहा कि भारतीय सेना को उसकी जगह से कैसे हटाया जाये।

पैंगॉग त्सों झील के दक्षिणी क्षेत्र चुशुल सब सेक्टर में भारतीय और चीनी सेना की तैनाती 300 से भी कम थी। इसी दौरान भारतीय सैनिकों ने अपनी स्तिथि एक बार फिर मजबूत कर ली थी। चीनी सैनिक फिंगर चार पर थे। तो वहीं भारतीय सेना ने भी फिंगर आठ, जो फिंगर चार से उंची है उस पर अपनी पकड़ बना ली थी। इन दोनों फिंगर के बीच की दूरी लगभग आठ किलो मीटर थी। इसी समय भारतीय और चीनी सेनाओं की तरफ से 100 से ज्यादा बार फायरिंग की गई थी। यहां सैनिकों के बीच की दूरी 500 मीटर से भी कम थी।

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वार्ता के बाद चीन की ओर से नहीं है आक्रमकता

सरकारी अधिकारी ने बताया कि अब वार्ता के बाद स्तिथियां शांत हो चुकी हैं। फिलहाल धमकी और आक्रमकता बंद है अब चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। क्योंकि यह अब शीर्ष नेतृत्व के द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा कमांडर स्तर की शांति बैठके भी की जाएंगी। सैन्य कमांडर निश्चित रूप से बात करेंगे। हम अपनी बात रखेंगे वह अपनी बात रखेंगे। लेकिन मुझे नहीं लगता कि उनके सैन्य कमांडर को मामूली रियायत से परे किसी भी चीज के लिए सहमत होने का अधिकार होगा।

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