भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यूक्रेन के कम अंकों वाले मेडिकल छात्रों को यहां दाखिला देने से किया इंकार

भारत सरकार ने सुप्रीमकोर्ट को गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया है कि यूक्रेन से युद्ध के दौरान वापस भारत लौटे छात्रों को यहां के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला नहीं दिया जा सकता।

Updated On: Sep 15, 2022 18:44 IST

Dastak

Photo Source- Forbes India (Google)

भारत सरकार ने सुप्रीमकोर्ट को गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया है कि यूक्रेन से युद्ध के दौरान वापस भारत लौटे छात्रों को यहां के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला नहीं दिया जा सकता। सरकार के अनुसार यहां के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम में इसके लिए कोई प्रावधान नहीं था। दूसरा ऐसी छूट देने से भारत में चिकित्सा शिक्षा के मानकों में बाधा आएगी। क्योंकि इनके खराब अंकों की वजह से इन्हें यहां दाखिला नहीं मिला था इसलिए ही ये यहां से यूक्रेन गए थे।

सरकार ने छात्रों के यूक्रेन जाने के दो प्रमुख कारण गिनाए-

सरकार के सुप्रीमकोर्ट में दिए गए इस हल्फनामे के बाद गुरुवार को होने वाली सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए टाल दिया गया है। सरकार ने इन छात्रों के यूक्रेन जाने के दो प्रमुख कारण बताए हैं। सरकार के अनुसार या तो ये छात्र वहां नीट की परीक्षा में खराब अंकों के कारण गए थे या फिर सस्ती पढ़ाई करने के लिए गए थे। सरकार ने इन छात्रों के लिए विकल्प के तौर पर कहा है कि ये छात्र यूक्रेन में अपने कॉलेजों से अप्रूवल लेकर अन्य देशों में जाकर अपनी डिग्री पूरी कर सकते हैं।

सरकार के अनुसार इन छात्रों को दाखिला देना दूसरे छात्रों के साथ होगा अन्याय-

सरकार के अनुसार अगर हम इन छात्रों को खराब नीट स्कोर के बावजूद भी भारत के अच्छे मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दे देते हैं तो ये उन छात्रों के साथ अन्याय होगा जो नीट में कम अंकों के कारण इन कॉलेजों में दाखिला लेने से वंछित रह गए थे। वहीं सरकार अगर इन्हें प्राईवेट संस्थानों में भेजती है तो वहां की फीस अधिक होने के कारण हो सकता है कि ये छत्र उसे भर पाने में सक्षम न हो।

नेशनल मेडिकल कमीशन ने अकेडमिक मोबिलिटी कार्यक्रम का किया था स्वागत-

इसी माह की शुरुआत में भारत की नेशनल मेडिकल काउंसिल ने यूक्रेन सरकार द्वारा इन छात्रों के लिए अकेडमिक मोबिलिटी कार्यक्रम का स्वागत किया था। जिसके अनुसार छात्र अपने गृह देश में भी रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकता है लेकिन उसे डिग्री उसके यूक्रेन में ही स्थित मेडिकल कॉलेज से मिलेगी। लेकिन ये फैसला यूद्ध के हालातों में केवल अस्थायी तौर पर लागू किया गया था।

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भारतीय छात्र यूक्रेन का रुख क्यों करते हैं-

भारत में एमबीबीएस की डिग्री हासिल करना आसान काम नहीं है। यहां होने वाली नीट की परिक्षा में प्रतिवर्ष आठ लाख से अधिक छात्र अप्लाई करते हैं लेकिन कुल सीटें 88 हजार हैं। ऐसे में सात लाख से अधिक छात्र जो डॉक्टर बनने का सपना संजोए रखते हैं वो अपनी अलग राह चुनते हैं और यूक्रेन जैसे देशों में जाकर कम अंकों के साथ सस्ती मेडिकल डिग्री ले आते हैं। हालांकि ये भी जरुरी नहीं है कि उपरोक्त कारण ही इन छात्रों के युक्रेन जाने का प्रमुख कारण हो, इसके पीछे कई अन्य कारक भी काम कर सकते हैं।

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