जगदीप धनखड़ की उपराष्ट्रपति पद की जीत 1997 से लेकर अबतक की सबसे बड़ी जीत है

एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ को शनिवार को भारत का उपराष्ट्रपति चुन लिया गया। वे भारत के 14 वें उपराष्ट्रपति हैं।

Updated On: Aug 7, 2022 11:21 IST

Dastak

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एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ को शनिवार को भारत का उपराष्ट्रपति चुन लिया गया। वे भारत के 14 वें उपराष्ट्रपति हैं, उन्होंने भारी अंतरों से अपनी प्रतिद्वंदी विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया है। धनखड़ को इस चुनाव में जहां 528 वोट मिले वहीं अल्वा को केवल 182 वोट ही पड़े।

अपने प्रतिद्वंद्वी पर 72.8 प्रतिशत वोट हासिल कर धनखड़ ने इतिहास रच दिया है। धनखड़ की जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा का वर्चस्व भी दिखा रही है। भारतीय जनता पार्टी पर अब देश के सभी उच्च पद हैं जिसमें राष्ट्रपति से लेकर उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष तक के पद शामिल हैं।

71 साल के जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति पद के लिए देश के पहले ऐसे उम्मीदवार भी हैं जिनका बैकग्राउंड संघ परिवार से नहीं है। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक धनखड़ की ये जीत सन् 1997 के बाद से अब तक की सबसे बड़ी जीत है। बीते छह उपराष्ट्रपति चुनाव में 725 वैध वोटों के हिसाब से 72.8 फीसदी वोट हासिल करना अब तक का सबसे अधिक अंतर है।

वहीं केआर नारायणन अभी भी उपराष्ट्रपति पद के लिए भारी अंतरों से जीतने वालों में पहले स्थान पर बने हुए हैं। 1992 में डाले गए 701 वोटों में से उन्हें 700 वोट मिले थे। फिलहाल धनखड़ के प्रदशर्न ने नायडू के 2017 के प्रदर्शन को भी दो प्रतिशत से पीछे कर दिया है।

कांग्रेस के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हामिद अंसारी ने 2007 में 762 वैध मतों में से 60.51 प्रतिशत वोट हासिल की थी। वो 2007 से 2017 तक देश के उपराष्ट्रपति रहे थे। 2017 में हुए उपराष्ट्रपति चुनावों में भाजपा उम्मीदवार वेंकैया नायडू को 760 वैध मतों में से 67.89 प्रतिशत वोट मिले थे।

जानें नए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें-

जगदीप धनखड़ राजस्थान राज्य से भैरों सिंह शेखावत के बाद देश के दूसरे उपराष्ट्रपति हैं। वे राजस्थान के किसान परिवार में पैदा होने के कारण वहां के प्रमुख वकीलों में से भी एक बन गए उन्होंने वहां के उच्च न्यायालय और दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में भी अपना अभ्यास किया है। उन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन का भी नेतृत्व किया है।

1989 में उन्होंने सार्वजनिक रुप से राजनीति में प्रवेश किया और पहली ही बार में वो उसी साल राजस्थान के झुंझुनू से लोकसभा चुनाव जीत लिया। उन्होंने चंद्रशेखर के नेतृत्व वाली जनता दल सरकार में संसदीय मामलों के राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया है। वे 2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बने।

जाट जगदीप धनखड़ को भाजपा ने क्यों बनाया उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार?

उन्होंने राजस्थान में जाट समाज को ओबीसी का दर्जा देने सहित अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित मुद्दों का समर्थन समय-समय पर किया है। उन्होंने सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ में अपनी स्कूलींग पूरी की है, उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की है।

जगदीप 2003 में बीजेपी में शामिल हुए हैं, इससे पहले बताया जाता है कि उन्होंने आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ कानूनी मामले भी लड़े हैं। ऐसा एक मामला आरएसएस के नेता इंद्रेश कुमार के खिलाफ भी धनखड़ ने लड़ा था, जो काफी चर्चाओं में रहा है।

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