Joshimath Sinking: ISRO ने किया बड़ा खुलासा, 12 दिनों में 5.4 सेंटीमीटर तक धंसी जमीन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के नेशनल रिमोट सेविंग सेंटर के द्वारा उत्तराखंड के जोशीमठ शहर की छवियों को उपग्रह के माध्यम से दर्शाया गया है,27 दिसंबर 2022 से 8 जनवरी 2023 तक जोशीमठ का धंसाव 5.4 सेंटीमीटर तक दर्ज किया गया।

Updated On: Jan 13, 2023 15:41 IST

Dastak Web Team

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मैना कटारिया

जोशीमठ में जमीन धंसने से सड़कों और घरों की दीवारों पर आई दरारों ने लोगों को डरा दिया है जोशीमठ के लोग अपनी जिंदगी डर के साए में जी रहे हैं, वहीं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के नेशनल रिमोट सेविंग सेंटर के द्वारा उत्तराखंड के जोशीमठ शहर की छवियों को उपग्रह के माध्यम से दर्शाया गया है, यह छवि इस बात को स्पष्ट करती है की जोशीमठ की जमीन धीरे धीरे धंस रहा है, 27 दिसंबर 2022 से 8 जनवरी 2023 तक जोशीमठ का धंसाव 5.4 सेंटीमीटर तक दर्ज किया गया।

सैकड़ों लोग हुए बेघर-

जोशीमठ के कई जिलों में भू-धंसाव की घोषणा की जा चुकी है जिसमें चमोली जिला भी शामिल है भू-धंसाव के कुछ दिनों में ही सड़कों और घरों की दीवारों में दरारे स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है, इसके चलते कई परिवारों को अपना घर छोड़कर स्थानांतरित करना पड़ा क्योंकि उनके घर अब उनके लिए खतरा बन चुके थे। सरकार ऐसी परिस्थितियों में अपनी सूझ-बूझ का प्रयोग करते हुए आगे बढ़ रही है, सरकार के द्वारा 1.5 लाख रुपए अंतरिम राहत पैकेज की घोषणा की गई है, इसके साथ ही घर से बेघर हो रहे लोगों के लिए पुनर्वास पैकेज पर भी काम किया जा रहा है।

बड़ी इमारतों को तोड़ना-

भू-धंसाव में घरों के साथ-साथ होटलों और बड़ी इमारतों में भी दरार देखी गई है जोशीमठ में दो होटलों को तोड़ने का काम गुरुवार को शुरू किया गया लेकिन खराब मौसम के चलते वह पुराने हो सका। अब बताया जा रहा है कि केवल होटल मलारी इन(Malari Inn) और माउंट व्यू(Mount view)  होटल को ही तोड़ा जाएगा, क्योंकि उनका अस्तित्व आसपास के ढांचे के लिए खतरा बन सकता है। वहीं प्रशासन के द्वारा लोगों को यह आश्वासन दिया गया है कि अभी कोई अन्य घर नहीं गिराया जाएगा।

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अफवाह-

जोशीमठ को लेकर लोगों में जहां एक तरफ डर है वही अफवाह भी फैल रही है, अफवाह है कि जल्द ही जोशीमठ डूब जाएगा और वह कभी भी नजर नहीं आएगा। लोगों में फैलती अफवाह को दूर करने के लिए और भू-धंसाव का कारण जाने के लिए कई विशेषज्ञ टीमों को इस काम में लगाया गया है विशेषज्ञ टीम भू-धंसाव का दोषी एनटीपीसी को ठहराया है। विशेषज्ञ टीम का मानना है कि भू-धंसाव का एनटीपीसी के द्वारा जलविद्युत परियोजना के लिए खोदी जा रही सुरंग है, वहीं एनटीपीसी ने अपने एक बयान में यह दावा किया है की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए खुद ही जा रही सुरंग जोशीमठ के नीचे से नहीं गुजरती।

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