कालकाजी मंदिर का जिम्मा दिल्ली के गांवों पर था, आजादी के बाद हुआ व्यवसायीकरण !

दिल्ली के गुर्जर समाज के लोग माँ की पिंडी को कलकत्ता से लाये थे और फ़िर गांव झाडिया मढ़िया गढ़ी में कालकाजी मंदिर की स्थापना की। शायद इसी कारण मंदिर की छत पर आज भी माँ गुजरी की प्रतिमा है। देहात समाज की इस मंदिर में श्रद्धा को देखते हुए इसकी देख रेख का ज़िम्मा भी आस-पास के गांव के सम्मानित बुज़ुर्गो के पास ही रहा।

Updated On: Mar 28, 2021 19:15 IST

Dastak

Photo Source- Gagandeep Singh

गगनदीप सिंह जेलदार

पिछले माह कालकाजी मंदिर पर दिल्ली उच्च-न्यायलाय का एक महत्वपूर्ण फैसला आया जिसमें कोर्ट ने मंदिर का व्यवसायीकरण हो जाने पर चिंता जाहिर की थी, इसलिए आज ये अहम जानकारी आप लोगों तक पहुंचाने का निर्णय मैंने लिया है। दरअसल कालका माँ को दिल्ली और दिल्ली के नज़दीक रहने वाला देहात समाज सदियों से पूजता आया है।

कथाओं और लोकोक्तियों के अनुसार दिल्ली के गुर्जर समाज के लोग माँ की पिंडी को कलकत्ता से लाये थे और फ़िर गांव झाडिया मढ़िया गढ़ी में कालकाजी मंदिर की स्थापना की। शायद इसी कारण मंदिर की छत पर आज भी माँ गुजरी की प्रतिमा है। देहात समाज की इस मंदिर में श्रद्धा को देखते हुए इसकी देख रेख का ज़िम्मा भी आस-पास के गांव के सम्मानित बुज़ुर्गो के पास ही रहा। पर देश की आज़ादी के बाद चीज़ें बदली और चिराग़ दिल्ली के एक परिवार ने कालकाजी मंदिर पर अपना एकाधिकार स्थापित कर लिया और जैसा दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कालकाजी मंदिर को एक व्यवसाय में परिवर्तित कर दिया।

जय कालका माई

पिछले महीने कालकाजी मंदिर पर दिल्ली उच्च-न्यायलाय का एक महत्वपूर्ण फैसला आया जिसमे कोर्ट ने मंदिर को...

Posted by Gagandeep Singh Zaildaar on Sunday, 28 March 2021

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उपरोक्त तस्वीरें यह बताने के लिए साझा कर रहा हूं, जिससे आपको यह पता चल सके कि आजादी के पहले यह मंदिर डिस्ट्रिक्ट बोर्ड द्वारा संचालित किया जाता था। और आस पास के गावों के सम्मानित बुज़ुर्ग इसका संचालन करते थे ना की कोई विशेष परिवार।

(उपरोक्त लेख पेशे से अधिवक्ता और फिल्ममेकर गगनदीप सिंह जेलदार द्वारा लिखा गया है, जिसे दस्तक इंडिया द्वारा संपादित किया गया है, ये उनके निजी विचार हैं।)

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