लक्षद्वीप में छात्रों को अब मिड-डे-मील में मिलेगा मांस से बना खाना, जानें इसके पीछे का कारण

लक्षद्वीप के शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी कर यहां उनके तहत आने वाले सभी द्वीपों में पड़ने वाले स्कूल प्रधानाचार्यों को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है जो अदालत ने 2 मई को दिया था।

Updated On: Jul 23, 2022 18:23 IST

Dastak

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Source- Pixabay)

लक्षद्वीप में पढ़ने वाले स्कूली छात्र अब अपने मिड-डे-मील में चिकन और मांस से बने खाने को खा सकेंगे। भारत के इस केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने स्कूल से जुड़े अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने का निर्देश देते हुए ये रोक हटाने को कहा है।

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक लक्षद्वीप के शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी कर यहां उनके तहत आने वाले सभी द्वीपों में पड़ने वाले स्कूल प्रधानाचार्यों को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है जो अदालत ने 2 मई को दिया था। जिसके तहत स्कूलों में पहले की तरह बच्चों को मांस, चिकन, मछली, अंडा और अन्य मांसाहारी खाना पहले की तरह परोसने का आदेश है।

शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कुछ अंश भी शामिल किए हैं जैसे खाने में मीट, चिकन, अंडा और मछली जैसे अन्य सामान जो लक्षद्वीप के बच्चों को पूर्व में तैयार कर परोसा जाता था वो अगले आदेश तक उनके खाने में शामिल रहे। स्पष्ट शब्दों में पहले वाली व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।

ममता के मंत्री पार्थ चटर्जी को ईडी ने किया गिरफ्तार, उनकी चहेती अर्पिता मुखर्जी भी हिरासत में

लक्षद्वीप प्रशासन के डेयरी फार्मों को बंद करने और स्कूली बच्चों के मिड-डे मील के मेन्यू से मांस उत्पादों को हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने केरल हाई कोर्ट के आदेशों को जारी रखने का निर्देश दिया था जिसमें आधिकारियों को मेन्यू में मांस से बने उत्पादों को शामिल करने का निर्देश दिया गया था।

केरल हाईकोर्ट ने 22 जून 2021 को लक्षद्वीप प्रशासन के डेयरी फार्मों को बंद करने और मिड-डे मील में से मांसाहारी भोजन हटाने के आदेश पर रोक लगा दी थी।

हरियाणा में सितंबर माह में होंगे पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव- धनपत सिंह

ताजा खबरें