ममता ने खेला मास्टर स्ट्रोक, मुख्य सचिव को केंद्र के पास नहीं जाने दिया

केंद्र और बंगाल सरकार के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार द्वारा तलब किए गए राज्य के मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय की सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद उन्हें अपना प्रमुख सलाहकार नियुक्त कर दिया है।

Updated On: Jun 1, 2021 11:36 IST

Dastak

फाइल फोटो (Photo source : Google)

जावेद इकबाल

केंद्र और बंगाल सरकार के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस विवाद ने तब नया मोड़ ले लिया जब सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार द्वारा तलब किए गए राज्य के मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को वहां भेजने से इंकार कर दिया। ममता ने केंद्र को झटका देते हुए अलापन की सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद उन्हें अपना प्रमुख सलाहकार नियुक्त कर दिया। बंगाल के मुख्य सचीव अलापन बंद्योपाध्याय 31 मई को रिटायर होने वाले थे। लेकिन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी ममता ने केंद्र को कोरोना महामारी के कारण मुख्य सचिव की सेवा को तीन महीने का विस्तार देने का अनुरोध किया था, जिसे केंद्र ने मान लिया था।

विवाद ने तब जन्म लिया जब प्रधानमंत्री मोदी चक्रवाती तूफान यास से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए बंगाल के दौरे पर गए। कलाइकुंडा एयरबेस में समीक्षा बैठक बुलाई गई थी, उस बैठक में ना तो मुख्यमंत्री ने हिस्सा लिया और ना ही मुख्य सचिव ने। ऐसे में दोनों पर प्रोटोकॉल के उल्लंघन का आरोप लगा था। उसके कुछ देर बाद ही केंद्र ने मुख्य सचिव को डेपुटेशन पर 31 मई को दिल्ली पहुंचने का निर्देश दिया था। बाद में ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को कहा था कि प्रदेश सरकार कोरोना महामारी की मुश्किल घड़ी में अपने मुख्य सचिव को कार्यमुक्त नहीं कर सकती उन्होंने केंद्र के इस फैसले को वापस लेने पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था।

क्या कहते हैं नियम-

भारतीय प्रशासनिक सेवा नियम 1954 के नियम 6(1) के तहत किसी राज्य के कैडर के अधिकारी की प्रतिनियुक्ति केंद्र दूसरे राज्यों या सार्वजनिक उपक्रम में संबंधित राज्य की सहमति से ही की जा सकती है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के नियम 1954 के तहत इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य में सहमति नहीं होने की स्थिति में केंद्र का फैसला ही लागू होता है लेकिन ममता बनर्जी का आरोप है कि राज्य सरकार से सलाह मशविरा किए बिना केंद्र का फैसला गैरकानूनी और संघवाद की अवधारणा का उल्लंघन करता है। पूर्व मुख्य सचिव बासुदेव बनर्जी इस पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि सरकार चुनिंदा तरीके से भारतीय प्रशासनिक सेवा नियम 1954 के नियम की व्याख्या कर रही है। इसके पहले हिस्से में राज्य से मंजूरी लेने की बात कही गई है, मतभेद की स्थिति में ही केंद्र का फैसला मान्य होगा।

लेकिन पहले हिस्से पर अमल नहीं किया गया है, यानी कि राज्य सरकार से कोई मंजूरी ही नहीं ली गई है। उनका कहना है कि केंद्र का यह आदेश तकनीकी और कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता है। दूसरा सीएम ममता बनर्जी द्वारा मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को अपना विशेष सलाहकार बनाने के निर्णय को केंद्र सरकार ने अपना प्रतिष्ठा का विषय मान लिया है। सूत्रों की मानें तो गृह मंत्रालय बंद्योपाध्याय के खिलाफ चार्ज शीट जारी करने की तैयारी कर रहा है।

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लेकिन सवाल ये उठता है कि जब बंगाल कोरोना महामारी के साथ-साथ चक्रवाती तूफान की आपदा से घिरा हुआ है तो ऐसे समय में यह विवाद कहां तक उचित है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि इस मामले को लेकर केंद्र और राज्य सरकार से कहीं न कहीं चूक हुई है लेकिन यह स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान नहीं है। इस नाजुक वक्त में दोनों सरकारों को एक टीम के रूप में काम करना था लेकिन हम आशा करते हैं कि यह विवाद जल्द खत्म होगा और केंद्र और राज्य दोनों बंगाल में जो इस वक्त दोहरी आपदाओ से जूझ रहा है उसे निकालने में समर्थ होंगे और एक बेहतर बंगाल के भविष्य के लिए दोनों मिलकर काम करेंगे।

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