देश में ऑक्सीजन की किल्लत, दिल्ली में सिर्फ 8 - 10 घंटे का ऑक्सीजन शेष - केजरीवाल

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में ऑक्सीजन की इतनी भारी कमी हो गयी है कि हमारे पास कुछ ही घंटों के लिए ऑक्सीजन अब बची है।

Updated On: Apr 21, 2021 10:28 IST

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अदिति गुप्ता

इस वक्त देश के हालात बेकाबू होते दिख रहे हैं। कोरोना संक्रमितो के बढ़ते मामलों के चलते ऑक्सीजन की मांग तेजी से बढ़ गई है। दिल्ली में इस वक्त आक्सीजन की भारी किल्लत हो चली है। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में ऑक्सीजन की इतनी भारी कमी हो गयी है कि हमारे पास कुछ ही घंटों के लिए ऑक्सीजन अब बची है। सीएम ने केंद्र सरकार से तत्काल ऑक्सीजन मुहैया कराने की अपील की है।

हालांकि दिल्ली के अलावा दूसरे राज्य भी ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं । दिल्ली समेत कई राज्यों में कोरोना मामले लगातार बढ़ रहे हैं और कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने से ऑक्सीजन की खपत भी अधिक हो गई है। ऐसे में केंद्र सरकार की प्राथमिकता बनती है कि राज्यों को उनके डिमांड के मुताबिक ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए।

अगर हम केंद्र सरकार के आंकड़ों को देखें तो इस वक्त देश में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध है। मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर ( MoHFW) के मुताबिक देश में डिमांड पूरी करने के लिए ऑक्सीजन का प्रोडक्शन पूरी क्षमता के साथ हो रहा है।

(MoHFW) द्वारा जारी आंकड़ों के हिसाब से देश में रोजाना 3,842 मेट्रिक टन की खपत हो रही है जबकि देश में रोजाना 7,287 मैट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है। यह आंकड़े 12 अप्रैल को जारी किए गए थे जिससे स्पष्ट होता है कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध है।

12 अप्रैल तक देश में 50 हजार मैट्रिक टन ऑक्सीजन का स्टॉक था, जिसमें मेडिकल और इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन भी शामिल है। जब देश में खपत से ज्यादा ऑक्सीजन उपलब्ध है तो फिर राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत क्यों हो रही है ? दरअसल देश में कोरोना संक्रमितो के आंकड़े में एकदम से भारी इजाफा हुआ है, जिसके चलते ऑक्सीजन की सप्लाई में दिक्कत हो रही है।

क्योंकि लिक्विड ऑक्सीजन को डिस्ट्रीब्यूटर तक पहुंचाने के लिए क्राइजोनिक टैंकरों का इस्तेमाल किया जाता है और जो इस वक्त कम पड़ रहे हैं। इसके अलावा रिफिलिंग के लिए सिलेंडरों की मात्रा भी कम पड़ रही है। फिलहाल देश में 1200 - 1500 क्राइजोनिक टैंकर है जो शायद कोरोना की दूसरी लहर की मार झेलने के लिए पर्याप्त होते लेकिन इस वक्त देश में पौने तीन लाख से ज्यादा केसेस सामने आ रहे हैं, जिस हिसाब से टैंकरों की संख्या कम है।

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इसके अलावा कई मरीज थोड़ी सी सांस की दिक्कत होने पर घर में ऑक्सीजन सिलेंडर को स्टोर कर रहे हैं जिससे परेशानी और बढ़ती दिख रही हैं।

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