मनरेगा में रिकॉर्ड 11 करोड़ मजदूर हुए पंजिकृत, तालाबंदी के दौरान हुए पलायन का असर

कोरोना महामारी (Corona Pandemic) का प्रकोप बढ़ने के बाद भारत में पिछले साल की गई तालाबंदी (Lockdown) के बाद दसियों हज़ार प्रवासी मजदूर शहर छोड़ वापस अपने गाँवों में लौट आए। ऐसे में इनके लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) एक मुख्य रोजगार के रुप में उभरी है।

Updated On: Apr 2, 2021 10:17 IST

Dastak

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कोरोना महामारी (Corona Pandemic) का प्रकोप बढ़ने के बाद भारत में पिछले साल की गई तालाबंदी (Lockdown) के बाद दसियों हज़ार प्रवासी मजदूर शहर छोड़ वापस अपने गाँवों में लौट आए। ऐसे में इनके लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) एक मुख्य रोजगार के रुप में उभरी है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020-21 के दौरान 11 करोड़ से अधिक लोगों ने मनरेगा योजना के तहत काम करने के लिए अपना पंजिकरण कराया। मनरेगा ने अपने स्थापना वर्ष 2006-07 के बाद से अब जाकर एक वर्ष में 11 करोड़ का आंकड़ा पार किया है।

41 प्रतिशत अधिक लोगों ने उठाया योजना का लाभ-

1 अप्रैल को उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि 11.17 करोड़ लोगों ने 2020-21 में योजना का लाभ उठाया, जो 2019-20 में 7.88 करोड़ से 41.75 प्रतिशत अधिक है। इस योजना का लाभ उठाने वाले कुल लोगों की संख्या 2013-14 और 2019-20 के बीच 6.21-7.88 करोड़ थी। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान नौकरी के नुकसान के मद्देनजर, अतिरिक्त 3 करोड़ लोगों ने इस ग्रामीण नौकरी योजना का रुख किया।

आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 के दौरान मनरेगा के तहत रिकॉर्ड 7.54 करोड़ ग्रामीण परिवारों ने काम किया है। जो 2019-20 की अपेक्षा 5.48 करोड़ अधिक है और वृद्धी 37.59 प्रतिशत की है। इससे पहले अबतक 2010-11 में ही 5.5 करोड़ लोग रिकॉर्ड स्तर पर मनरेगा में काम करने के लिए दर्ज किए गए थे।

ये है मनरेगा और ऐसे हुई थी लागू-

मनरेगा योजना के तहत, प्रत्येक ग्रामीण परिवार में से वो वयस्क सदस्य जो खुद अकुशल कार्य करते हैं, वे एक साल में कम से कम 100 दिन का वेतन पाने के हकदार हैं। 2006-07 में इस योजना को देश के 200 सबसे पिछड़े ग्रामीण जिलों में शुरू किया गया था। 2007-08 के दौरान इस योजना का विस्तार अतिरिक्त 130 जिलों में किया गया और 2008-09 के दौरान इसे पूरे देश में समान रुप से लागू कर दिया गया।

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2020-21 में ये100-दिवसीय रोजगार पूरा करने वाले परिवारों की संख्या भी 68.58 लाख के अबतक के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसमें 2019-20 की तुलना में 40.60 लाख से 68.91 प्रतिशत की वृद्धि हुई। प्रति परिवार रोजगार के औसत दिन भी 2019-20 में 48.4 दिनों से बढ़कर 2020-21 में 51.51 दिन हो गए।

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