रुस से भारत आई स्पूतनिक V वैक्सीन की पहली खेप, अभी अप्रुवल के लिए भेजी जाएगी

रूस (Russia) के कोरोनावायरस वैक्सीन स्पूतनिक V (Sputnik V) का पहला बैच भारत पहुंच गया है। हैदराबाद में आज हवाईजाहज द्वारा रुस से आई वैक्सीन की पहली खेप को उतारा गया है। पहली खेप में वैक्सीन की 1,50,000 डोज शामिल है।

Updated On: May 1, 2021 18:43 IST

Dastak

Photo Source- MEA

रूस (Russia) के कोरोनावायरस वैक्सीन स्पूतनिक V (Sputnik V) का पहला बैच भारत पहुंच गया है। हैदराबाद में आज हवाईजाहज द्वारा रुस से आई वैक्सीन की पहली खेप को उतारा गया है। रिपोर्टों को अनुसार पहली खेप में वैक्सीन की 1,50,000 डोज शामिल है। इसके अलावा रुस इसी महीने वैक्सीन की 30 लाख डोज भारत भेजेगा। ये सभी वैक्सीन डॉ रैडी की लेबोरेटरी में ही पहुंचाई जाएगी। जो रुस की इस वैक्सीन का भारतीय पार्टनर है। वैक्सीन की ये खेप आ जाने से उम्मीद लगाई जा रही है कि इससे भारत के टीकाकरण अभियान को बल मिलेगा जो एक मई से 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए शुरु हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार डा. रैडी इन वैक्सीनों की खुराकों को लोगों में वितरण करने से पहले भारत की केंद्रीय औषध प्रयोगशाला से अप्रुवल लेन चाहता है। रुस की वैक्सीन बनाने वाली इस कंपनी ने एक ट्वीट के जरिए कहा- "स्पूतनिक वी का पहला बैच हैदराबाद पहुंच गया है। ये ठीक उस दिन पहुंचा है जिस दिन भारत महाटीकाकरण अभियान की शुरुआत कर रहा है। आइए संयुक्त रूप से इस महामारी को हराएं। साथ में हम मजबूत हैं।"

वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने भी रुस से वैक्सीन के भारत आने की जानकारी ट्वीट कर दी है।

भारतीय दवा नियामकों ने इस साल 12 अप्रैल को स्पूतनिक वी वैक्सीन को प्रतिबंधित उपयोग करने की अनुमति दी हुई है। स्पूतनिक वी को 91.6 प्रतिशत तक प्रभावशाली बताया गया है। इतनी प्रभावशक्ति के साथ ये दुनिया का पहला टीका बना हुआ है। द लांसेट की रिपोर्ट के अनुसार ये टीका सुरक्षित और प्रभावशाली प्रतीत होता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन की तरह, स्पूतनिक वी भी मानव एडेनोवायरस वैक्टर पर आधारित है। स्पूतनिक वी को गामलेया संस्थान में विकसित किया गया था, जो इस वैक्सीन के अन्य वर्जन बनाने पर भी काम कर रहा है।

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रूसी टीका के निर्माताओं के अनुसार, इसे 2-8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखा जा सकता है। यही तापमान कोविशिल्ड और कोवाक्सिन के लिए होता है। हालांकि इस वैक्सीन की दोनों खुराकें एक दूसरे से अलग बताई गई हैं और उन्हें 21 दिनों के भीतर लेना होता है।

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