Covaxin क्या है, क्या भारत दुनिया को देने जा रहा है कोरोनावायरस की वैक्सीन?

“सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन(CDSCO)” ने भारत बायोटेक इंडिया (BBIL) को उसकी कोरोनावायरस को लेकर बनाई गई वैक्सीन जिसका नाम “कोवैक्सीन(Covaxin)” है के मानव परिक्षण की अनुमति दे दी है।

Updated On: Jun 30, 2020 19:51 IST

Dastak

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भारत की शीर्ष दवा नियामक “सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन(CDSCO)” ने भारत बायोटेक इंडिया (BBIL) को उसकी कोरोनावायरस को लेकर बनाई गई वैक्सीन जिसका नाम “कोवैक्सीन(Covaxin)” है के मानव परिक्षण की अनुमति दे दी है। इस वैक्सीन का ट्रायल भारत में जुलाई से ही शुरु होने की संभावना है। अगर वैक्सीन का मानवीय परिक्षण सफल होता है तो भारत कोरोनावायरस पर जल्द ही जीत हासिल कर लेगा। साथ ही भारत दुनिया को भी कोरोनावायरस पर काबू करने की राह इस वैक्सीन के जरिए दिखा सकता है।

क्या है कोवैक्सीन और इसे विकसित कैसे किया गया है?

कौवैक्सीन कोविड19 यानी कि कोरोनावायरस की रोकथाम के लिए बनाई गई एक वैक्सीन है। जिसे बीबीआईएल(Bharat Biotech India) ने आईसीएमआर(Indian Council of Medical Research’s) और एनईवी(National Institute of Virology) के सहयोग से तैयार किया है। जानकारी के अनुसार एनआईवी ने एक एसिमटोमैटिक रोगी के शरीर से कोरोनावायरस के एक हिस्से को अलग कर मई की शुरुआत में ही बीबीआईएल को दे दिया। जिसका इस्तेमाल बीबीआईएल ने कोरोनावायरस को खत्म कर देने वाली वैक्सीन बनाने में किया।

हैदराबाद में ये प्रयोग किया गया है जिसके तहत ये वैक्सीन मृत कोरोनावायरस का इस्तेमाल इस वायरस के प्रभाव को खत्म करने के लिए करता है। "एक बार जब इस टीके को मानव शरीर में लगाया जाता है तो ये संक्रमित शरीर में वायरस को मार देती है जिसके बाद वायरस मानव शरीर में कोई असर नहीं कर पाता। ये मृत वायरस के रुप में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कार्य करता है और वायरस के प्रति एक एंटीबॉडी प्रतिक्रिया देता है।

बीबीआईएल के कोवाक्सिन का अभी तक सुअर और चूहों जैसे जानवरों पर प्रयोग किया है। जिसमें यह सुरक्षित पाई गई है। इसके बाद ही सीडीएससीओ ने अगली स्टेज में इसके मानवीय परिक्षण की अनुमती दी है।

वैक्सीन के मानवीय परिक्षण भारत के लिए क्या मायने रखता है-

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन द्वारा भारत बायोटेक इंडिया को दूसरे ट्रायल में मानवीय परिक्षण की अनुमति देने से भारत कोरोना वायरस की वैक्सीन विकसित करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा है। इस वक्त भारत में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और तेजी से जनसंख्या के एक बडे तबके को अपने प्रकोप में ले रहे हैं। ऐसे में वैक्सीन का प्रयोग निश्चित तौर पर भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है। वैक्सीन के ट्रायल के पहले दौर में एक छोटे मानवीय तबके पर इसका प्रयोग किया जाएगा और देखा जाएगा कि उनपर ये वैक्सीन क्या असर दिखा रही है। अगर उनपर ये प्रयोग सफल रहता है तो दूसरे फेज में इसे एक बडी जनसंख्या पर ट्रायल किया जाएगा।

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