Cyclone Yass: ताउते के बाद यास की तबाही, 15 लाख लोगों को सुरक्षित स्थान पहुंचाया गया

देश पर इन दिनों तूफानों का साया है। पहले ताउते चक्रवात ने महाराष्ट्र और गुजरात में तबाही मचाई थी। अब पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और आंध्रप्रदेश में यास चक्रवात का खतरा मंडरा रहा है।

Updated On: May 26, 2021 21:40 IST

Dastak

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जावेद इकबाल

देश पर इन दिनों तूफानों का साया है। पहले ताउते चक्रवात ने महाराष्ट्र और गुजरात में तबाही मचाई थी। अब पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और आंध्रप्रदेश में यास चक्रवात का खतरा मंडरा रहा है। पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के तटीय इलाकों में तूफान के टकराने से पहले ही दोनों राज्यों में भारी बारिश होने लगी है। उड़ीसा के भुवनेश्वर चांदीपुर और बंगाल के दीघा में लगातार बारिश हो रही है। वहीं तूफान को लेकर बिहार और झारखंड में भी अलर्ट जारी कर दिया है।

गौरतलब है कि अरब सागर की अपेक्षा बंगाल की खाड़ी में चक्रवात के लिए आदर्श दशाएं पाई जाती हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में आने वाले चक्रवात अरब सागर में उत्पन्न होने वाले चक्रवात की अपेक्षा ज्यादा खतरनाक होते हैं। ऐसे में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं तटरक्षक बलों की टीमें युद्ध स्तर पर लगी हुई है। इन टीमों ने पश्चिम बंगाल के 14 जिलों से लगभग 8 लाख और उड़ीसा के 7 जिलों से करीब डेढ़ लाख लोगों को 1200 के करीब राहत शिविरों में पहुंचाया है।

मौसम विभाग के मुताबिक तूफान के कारण तटीय इलाकों में 2 से साढ़े 4 मीटर ऊंची लहर उठ सकती है। चक्रवात से प्रभावित होने वाले क्षेत्र में देश के बड़े ऑक्सीजन संयंत्र भी स्थित हैं। ऐसे में अगर यह संयंत्र चक्रवात से प्रभावित होते हैं तो ये कुछ समय के लिए बंद रह सकते हैं। ऐसे में देश में ऑक्सीजन की किल्लत पैदा हो सकती है। कोरोना काल में देश में ऑक्सीजन की मांग इस समय सामान्य से काफी ज्यादा है। इसी को देखते हुए भारतीय रेलवे ने 12 घंटे के अंदर पश्चिम बंगाल उड़ीसा और झारखंड से 680 टन ऑक्सीजन को दूसरी जगह पर पहुंचा दिया है। इसके लिए रेलवे ने इन क्षेत्रों से कुल 8 ऑक्सीजन एक्सप्रेस चलाई है।

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चक्रवात पूर्वी तट के लिए कोई नई घटना नहीं है। यहां एक वर्ष के भीतर कई उष्णकटिबंधीय चक्रवात आते हैं। पिछले कई वर्षों में आए चक्रवात को देखने के लिए राज्य सरकारों ने काफी बेहतर काम किया है। जिसमें उड़ीसा का नाम उल्लेखनीय है। उड़ीसा का नाम उस वक्त अंतरराष्ट्रीय खबरों में आया था, जब उसने निसर्ग चक्रवात से निपटने के लिए बेहतर प्रबंधन किया था और UN की आपदा प्रबंधन की संस्था ने उसके प्रयासों को काफी सराहा था। क्योंकि तूफान के अधिक खतरनाक होने के बावजूद नुकसान काफी कम हुआ था। हालांकि उस समय अवसरचनात्मक नुकसान काफी हुआ था जो अभी भी एक चुनौती बना हुआ है।

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