हरियाणा के छह जिलों में सोशल मीडिया पर बैन असैंवधानिक

हरियाणा में 6 उपायुक्तों ने सोशल मीडिया चैनलस पर बैन लगा दिया। उनके अनुसार ये ग़ैरकानूनी है कहीं रजिस्टर नहीं है। अब उन्हें कौन बताए कि देश में अभी कोई कानून या नियम कायदे इसे लेकर बने ही नहीं है।

Updated On: Jul 12, 2020 12:56 IST

Dastak

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अजय चौधरी

खबर कश्मीर की नहीं हरियाणा की है, अब दिल्ली के नजदीक हरियाणा नहीं विकास दुबे है। नहीं तो इन जिला उपायुक्तों का ये असंवैधानिक कदम दिल्ली मीडिया को दिखाई देता। 6 उपायुक्तों ने सोशल मीडिया चैनलस पर बैन लगा दिया। उनके अनुसार ये ग़ैरकानूनी है कहीं रजिस्टर नहीं है। अब उन्हें कौन बताए कि देश में अभी कोई कानून या नियम कायदे इसे लेकर बने ही नहीं है।

बड़े चैनलों और अखबारों के सोशल मीडिया भी कहीं रजिस्टर अभी नहीं है। तो आप कैसे अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगा सकते हैं। आम व्यक्ति भी कुछ फिल्माए तो रोका उसे भी नहीं जा सकता। खबरों के अनुसार दो महीनों के भीतर हरियाणा के छह जिलों में मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की ये शुरुआत की गई है। सबसे पहले चरखी-दादरी के डीसी ने ये कदम उठाया उसके बाद सोनीपत, कैथल, नारनौल, भिवानी और अब आखरी में सीएम सिटी करनाल के डीसी ने ये कदम उठाया है।

अगर कोई फेक न्यूज़ फैला रहा है तो आप मामला दर्ज करवा करवाई अमल में लाएं। आप सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाकर क्या साबित करना चाहते हैं? दरअसल सोशल मीडिया किसी भी घटना को लाइव कर देता है जिसके बाद जवाब देने के लिए कुछ नहीं बचता अधिकारियों के पास कई बार। ऐसे में राह से कांटा हटाने का सबसे आसान रास्ता सोशल मीडिया पर बैन के जरिये खोजा जा रहा है।

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उपायुक्तों के अनुसार ये आम आदमी की मानसिक हालात पर गलत असर डाल रही है। लेकिन टीवी पर चीख चीख कर होने वाली डिबेट्स ने कभी आम आदमी की मानसिक हालात पर असर नहीं डाला। कोरोना वायरस के बहाने अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाने की ये शुरुआत है। इस शुरुआत से भी खतरनाक है इस तरह के बैन पर चुप्पी।

लोकल स्तर पर भारत में सोशल मीडिया के पत्रकारों को सताया जा रहा है। सिर्फ हरियाणा की ये कहानी नहीं है। नियम न होने से रोजाना नए पत्रकार भी पैदा हो रहे हैं वो भी गलत है। लेकिन हरियाणा में अखबार और टीवी के पत्रकार इसलिए चुप हैं क्योंकि वो सोशल मीडिया के खिलाफ पहले से ही आवाज उठाए थे। चरखी दादरी जहाँ से बैन की शुरुआत की गई है वहां के पत्रकारों ने कई बार ऐसे बयान दिए कि वो सोशल मीडिया वालों को पत्रकार नहीं मानते। जिस भी प्रेस वार्ता में ये पत्रकार जाएंगे उसका हिस्सा टीवी और प्रिंट मीडिया नहीं होगा। क्योकिं सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ने से सभी परेशान हैं।

बिरादरी के ही खिलाफ हो जाने की वजह से सोशल मीडिया की ये हालात हरियाणा में लोकल स्तर पर है। बाकि मूक सहमति ऐसे ही होगी सबकी तो इस लोकतंत्र में सबका स्वागत है। नंबर सबका आएगा।

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