बाईकर्स की ये समस्या भी सुनें, मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे

एक समस्या मुख्य न्यायाधीश को जो बाइर्कस की समझनी चाहिए वो है सुप्रीम कोर्ट का एक नियम जिसके तहत दिन में दुपहिया वाहनों की लाईटें जली रहे। जिसके कारण कंपनी उसे बंद करने का ऑप्शन ग्राहक को नहीं देती।

Updated On: Jun 29, 2020 18:57 IST

Dastak

Photo Source- Social Media

अजय चौधरी

मुख्य न्यायाधीश को हार्ले डेविडसन की सवारी करते देख एक सुख की अनुभूति हुई। उनका भी हक है एक सामान्य व्यक्ति की तरह अपने शौक को जीने का। एसए बोबडे जानते हैं कि वो बहुत सारे नियम कायदों से बंधे हुए हैं, वो दिल्ली की सड़कों पर खुले तौर पर बाइक लेकर उसकी सैर पर नहीं निकल सकते। इसलिए बस बैठकर देखकर ही खुश हो रहे हैं। हालाकिं तस्वीर नागपुर की है।

वाहन से प्यार करना कोई जुर्म नहीं-

दोपहिया या चोपहिया वाहनों से प्यार करना कोई जुर्म नहीं है, लेकिन जब आप एक सामान्य व्यक्ति से अलग हो जाते हैं, देश के मुख्यन्यायाधीश हो जाते हैं तो खुद-ब-खुद बहुत सारे बंधनों में आप बंध जाते हैं। न्यायाधीश ने पहले बताया हुआ है कि वो एक बुलेट भी रखते हैं। जब आप बाईक अपने पास रखते हैं और उसे चलाने का शौक भी तो आप बाइकरों को मिलने वाली खुशी और समस्या से भी सीधे जुड़ जाते हैं।

दिन में दुपहिया की लाईटें जले रहने के नियम में बदलाव हो-

एक समस्या मुख्य न्यायाधीश को जो बाइर्कस की समझनी चाहिए वो है सुप्रीम कोर्ट का एक नियम जिसके तहत दिन में दुपहिया वाहनों की लाईटें जली रहे। जिसके कारण कंपनी उसे बंद करने का ऑप्शन ग्राहक को नहीं देती। बहुत बडा बल्ब भी कईं बार जला रहता है, बैटरी भी खा जाता है, सामने वाले की आखें दिन में भी फोड देता है।

बाईकों को रात के समय लेग लाईट जलाने की अनुमति भी हो-

कोर्ट को नियमों में बदलाव कर कोई छोटी लाईट सारा दिन जली रहे ऐसा प्रावधान करना चाहिए। नहीं तो नियम सबको तोडने ही पड़ते हैं, बाईकरों की समस्या को देखते हुए रात के वक्त लेग लाईट चलाने की नियमों के मुताबिक अनुमति दी जाए। इस समस्या को एक बाइकर ही समझ सकता है। जिस बाईक पर मुख्यन्यायाधीश बैठे थे उसपर भी लेग लाईटें लगी हुई थी, जिसकी अनुमति कानून में नहीं है लेकिन जरुरी है।

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