क्रिकेट अनिश्चिताओं का क्षेत्र है, जहां शोहरत के साथ ख़ालीपन और अंधेरा भी मिलता है

क्रिकेट अनिश्चिताओं का क्षेत्र है, जहां शोहरत के साथ ख़ालीपन और अंधेरा भी मिलता है। संसद में 788 सीट हैं, लेकिन यहां एक बार 11 सदस्यीय टीम से बाहर हुए तो वापस आना नामुनकिन सा हो जाता है।

Updated On: Aug 16, 2020 17:23 IST

Dastak

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अजय चौधरी

क्रिकेट अनिश्चिताओं का क्षेत्र है, जहां शोहरत के साथ ख़ालीपन और अंधेरा भी मिलता है। संसद में 788 सीट हैं, लेकिन यहां एक बार 11 सदस्यीय टीम से बाहर हुए तो वापस आना नामुनकिन सा हो जाता है। जबकि राजनेता से लेकर अभिनेता तक मरते दम तक रिटायर नहीं होते। नेतागिरी से लेकर फिल्में सब आखरी सांस तक करते रहते हैं। एक बार क्रिकेटर टीम से बाहर हुआ तो उसके साथ पहचान और आर्थिक संकट का बोझ बढ़ जाता है। क्योकिं ख़र्च उसे पहले जैसे ही रखने होते हैं।

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क्रिकेटर को खेलने की क्षमता बची रहने के साथ भी टीम से बाहर और रिटायर होना पड़ता है। उसकी क़ाबिलियत के आगे जिंदगी का अंधेरापन और टीम में बतौर सदस्य रहते हुए बेहतर खेलने का दबाव की कल्पना हम कर नहीं सकते। अभी धोनी और रैना रिटायर हो रहे हैं, इससे पहले धोनी ने सचिन वाली पूरी टीम को रिटायर किया था। ऐसे बहुत से बेहतर क्रिकेटर हैं जिनके नाम तक हम भूल चुके हैं, न ही कभी उनकी रिटायरमेंट का जिक्र आया है। श्रीशंत से लेकर इशांत शर्मा जैसे खिलाड़ी आज भी टीम में वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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