सीएए एनआरसी नहीं, जनसंख्या नियंत्रण और यूनिफॉम सिविल कोड होंगे मुद्दे

हमारे पास सीमित संसाधन हैं, मेडिकल क्षेत्र में भी और खासकर सार्वजनिक परिवहन के। ऐसे में जब दूरी बनाते हुए ये संसाधन कम पड़ेंगे तो सबसे ज्यादा मुद्दा जो उछलेगा वो होगा जनसंख्या नियंत्रण कानून का।

Updated On: May 17, 2020 12:57 IST

Dastak

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अजय चौधरी

कोरोना वायरस के बादल जब छंटने लगेंगे तो सीएए और एनआरसी शायद पहले की तरह उतने अहम मुद्दे न रहें। लेकिन देश में धार्मिक आधार से लोगों का बंटे रहना हमेशा से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है, इसी मुद्दे में बाकि सब मुद्दों को समाहित किया जाता रहा है। या फिर ये कहा जा सकता है कि बाकि सब मुद्दों में धार्मिकता का घाेल होता ही है। वो न हो तो माहौल ऐसा हो गया है कि देश किसी भी मद्दे को गंभीरता से लेता ही नहीं है। भारत ने कोरोना वायरस की गंभीरता को भी काफी देर से समझा है।

सार्वजनिक परिवहन के हैं सीमित संसाधन-

जिंदगी अब जल्दी पहले जैसी सामान्य तो होगी नहीं, सभी को भीड़ भाड़ से दूर रहना है। लेकिन हमारे पास सीमित संसाधन हैं, मेडिकल क्षेत्र में भी और खासकर सार्वजनिक परिवहन के। ऐसे में जब दूरी बनाते हुए ये संसाधन कम पड़ेंगे तो सबसे ज्यादा मुद्दा जो उछलेगा वो होगा जनसंख्या नियंत्रण कानून का।

बिना धर्म का चोला ओढ़े कोई भी मुद्दा कामयाब नहीं होता-

और आप जानते हैं कोई भी मुद्दा बिना धर्म का चोला ओढ़े कामयाबी की राह पर आसानी से नहीं चल सकता। एक वर्ग को आपको यकीं दिलाना है कि आप सही हैं, बाकि तबके फिर कुछ भी कहते और सोचते रहें फर्क नहीं पड़ता। और ये मुद्दा ऐसा है कि जल्दी राह पकड़ेगा, लोगों को आसानी से समझ आएगा।

खाली हाथों में ये मुद्दे थमा दिए जाएंगे-

यूनिफॉर्म सिविल कोड भी अपना रास्ता इसके साथ साथ देखेगा। बात ये नहीं है कि ये मुद्दे क्यों लाए जाएंगे, सही है या गलत। बात ये है कि इन्हें ऐसे वक्त लाया जाएगा जब करने को कुछ बचेगा नहीं। हम किसी को कुछ दे पाने की स्थिति में जब नहीं होंगे ऐसे समय में उसके हाथ में ये मुद्दे थमा दिए जाएंगे। इसे वक्त की जरूरत मान लिया जाए।

क्या है जनसंख्या नियंत्रण कानून-

आसान शब्दों में जनसंख्या नियंत्रण कानून बच्चे पैदा करने को लेकर बनाए जाने वाले कानून को लेकर है। जिसके अनुसार देश में जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए अधिक बच्चों को पैदा करने पर रोक लगाई जा सकती है। या फिर अधिक बच्चों को कानूनी हक आदि से वंछित रखकर ऐसा किया जा सकता है। परिवार नियोजन करके योजना भी अभी तक चला रही है, जिसके जरिए समझाया जाता रहा है कि हम दो और हमारे दो, मतलब दो से ज्यादा बच्चे पैदा न करो। इसे ही बड़ा स्वरुप दिया जा सकता है।

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड-

यूनिफॉर्म सिविल कोड से आशय "एक देश एक कानून" से है। मतलब कि एक देश में जितने भी धर्म और समुदाय हैं सब पर सामान रुप से एक ही कानून लागू हों। भारत में विभिन्न धर्मों और उनकी विभिन्नताओं के चलते ऐसा कानून कभी लागू हो ही नहीं पाया। लेकिन ये कानून मौजूदा सत्ताधारी दल बीजेपी के घोषणापत्र का हिस्सा है। कोरोना वायरस प्रकोप के बाद अगर पार्टी जनसंख्या नियंत्रण कानून को आगे लेकर आती है तो साथ में उसको यूनिफॉर्म सिविल कोड भी लाना पड़ सकता है। ताकि वो देश के सभी नागरिकों पर सामान कानून से नियंत्रण कर सके।

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