राकेश टिकैत का बयान भड़काऊ नहीं, पश्चिमी उत्तरप्रदेश की है भाषा, लाठी किसान की है शान

किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) का एक बयान पेड मीडिया चैनलों पर काफी वायरल हो रहा है। जिसे राकेश टिकैत का भड़काऊ बयान माना जा रहा है। लेकिन अगर आप ये बात पश्चिमी उत्तरप्रदेश या हरियाणा के लोगों को कहेंगे तो हो सकता है वो आप पर हंसने लगे।

Updated On: Jan 28, 2021 12:55 IST

Ajay Chaudhary

Photo Source- Social Media

किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) का एक बयान पेड मीडिया चैनलों पर काफी वायरल हो रहा है। जिसे राकेश टिकैत का भड़काऊ बयान माना जा रहा है और किसान आंदोलन में हुई हिंसा का जिम्मेदार भी। लेकिन अगर आप ये बात पश्चिमी उत्तरप्रदेश या हरियाणा के लोगों को कहेंगे तो हो सकता है वो आप पर हंसने लगे क्योंकि ये वहां की आम बोली है। लाठी को लएठी देशी लहजे में कहा जाता है। किसान नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह के इस क्षेत्र में किसान लाठी लेकर हर जगह चलता है। ये उसके पुरखों की देन है और लाठी रखना शान का विषय भी है। टिकैत किसानों से लाठी का जिक्र न भी करते तो भी वो अपने साथ लाठी और ट्रोली में खलवा लगा के जरुर आते और आए भी। खलवा एक तरह का डंडा होता है जिसे ट्रोली में लगाया जाता है जिससे उसमें रखा समान नीचे न गिरे।

ऐसा क्या कह दिया था टिकैत ने-

इसपर आगे भी बात करते हैं लेकिन पहले आपको बता देते हैं राकेश टिकैत ने आखिर ऐसा क्या कहा था जो पेड चैनलों को भडकाऊ दिखने लगा। लेकिन दीप सिद्धु पर उन्होंने चुप्पी साध ली। राकेश टिकैत अपने बयान में कहते हुए सुने जा सकते हैं कि "सरकार मान नी रही, ज्यादा कैड़ी पड़ री सरकार, अपणा ले आईयो झंडा-झूंडा भी लगाना। लाठी गोती भी साथ राखीयो अपनी। झंडा लगाने की लिया। समझ जाईयो सारी बात, दिके झंडा लगेगा तिरंगा झंडा वैसा भी लगवालियो उसपे। अर आ जाओ बस, जमीन बचाने की लिया आ जाओ अपनी जमीन नहीं बच री।" आप ये वीडियो भी देखेें इससे जुड़ी-

टिकैत के आव्हान के बिना भी क्यों लाठी ले आते किसान-

हमने ऊपर लिखा कि अगर राकेश टिकैत किसानों से लाठी का जिक्र न भी करते तो भी वो अपने साथ लाठी और खलवे ले आते। पश्चिमी उत्तरप्रदेश की किसी भी रैली को आप निकाल कर देख लें या फिर चाहे बीजेपी की ही रैली हो तो आप बड़ी संख्या में लोगों के साथ लाठी पाएंगे। कंधे पर चादर, सर पर टोपी, कांधे पर चादर और हाथ में लाठी वहां के पहनावे का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वहां के लोगों की तरह आजकल कंधे पर चादर डाले नजर आते हैं। अपने दैनिक जीवन में इस्तेमाल आने वाली लाठी का प्रयोग आंदोलनों में पुलिसीया अत्याचार से बचने के लिए भी करता है।

टिकैत ने लाठी झंडे के लिए कहा था-

किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत ने लाठी झंडे लगाने के लिए कहा था, जिसमें कुछ गलत भी नहीं है। क्योंकि झंडे डंडो पर ही लगते हैं और लाठी पर भी लगाए जा सकते हैं। लाठी बांस का एक मजबूत डंडा होता है जिसे किसान सरसो का तेल पिला-पिला कर तैयार करता है। वो इस बहुत से कार्यों में इस्तेमाल करता है। ये बुजुर्गों को चलने का सहारा तो देती ही है साथ ही खेत के झाड़ भरे रास्तों पर चलते समय झाड़ हटाने के भी काम आती है। कुत्ते और अन्य जंगली जानवरों को भी भगाने के लिए किसान का सहारा होता है। खेती के बहुत से कामों में भी किसान इसका अपने अनुसार प्रयोग कर लेता है इसलिए इसे हमेशा अपने साथ रखता है।

टिकैत के लाठी गोती साथ रखने के बयान से फिर किसे आपत्ती हो सकती है और ये भडकाऊ किस एंगल से हो सकता है। ये बात समझ से परे है। सरकार मान नहीं रही, कैडी पड रही है ये सब किसानों और उस क्षेत्र की खड़ी बोली का हिस्सा है। राकेश टिकैत के पिता और किसान नेता स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत तो इससे भी अधिक सख्त भाषा सरकार के सामने बोल देते थे। ये तो उसके सामने कुछ भी नहीं है और हमारे अनुसार ये उस क्षेत्र के लोगों से नरमी से ही किया गया अनुरोध है।

(ये लेख अजय चौधरी द्वारा लिखा गया है। अजय "दस्तक इंडिया" वेबसाइट के एडिटर भी हैं। आप इस लिंक https://www.facebook.com/Ajaychaudharyyy/ पर जाकर उनसे फेसबुक पर भी जुड़ सकते हैं।)

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