रिया चक्रवर्ती जैसी लड़कियां करती हैं काला जादू?

सुशांत सिंह के पिता के आरोप के बाद से ही रिया चक्रवर्ती को प्रताड़ित किया जा रहा है। वह बंगाली हैं, जिसके कारण उन्हें काला जादू करने वाली बंगालन कहा जा रहा है। यही नहीं, लोग उन्हें नागिन भी कह रहे हैं, जिसने सुशांत को डस लिया है।

Updated On: Aug 6, 2020 15:26 IST

Dastak Online

Photo Source: Social Media

हिना

भारतीय सिनेमा ने हमें सिखाया है कि हीरो को नुकसान पहुंचाने के पीछे अक्सर किसी विलेन का हाथ होता है। कई बार हीरो की मौत या बर्बादी का कारण एक खूबसूरत अपनी ओर आकर्षित करने वाली महिला होती है जो हीरो (पुरूष) को बर्बाद कर देना चाहती है। कहीं न कहीं फिल्मों में होने वाली घटनाएं हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं। हम उन घटनाओं को असल जीवन से जो़ड़ने लगते हैं। ऐसा ही कुछ सुशांत के मामले में होता दिख रहा है। मुख्यधारा की मीडिया और सोशल मीडिया की एक बड़ी जमात ने सुशांत की मौत को फिल्म की कहानी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लगातार ऐसे विलेन की तलाश इस मामले में हो रही है जिसे सुशांत की मौत का जिम्मेदार ठहराया जा सके।

सबसे पहले नेपोटिज्म को उनके डिप्रेशन का कारण बताया गया। जिसमें करन जौहर, मुकेश और महेश भट्ट, सलमान खान, और संजय लीला भंसाली समेंत कई लोगों के नाम सामने आए। इन लोगों को जमकर जांच से पहले ही ट्रोल किया गया। लेकिन शक की सुई अब रिया चक्रवर्ती पर है। सुशांत के पिता ने राजीव नगर थाने में रिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है जिसमें रिया पर प्यार में फंसाकर सुशांत के पैसे ऐंठने, धोखाधड़ी, जालसाजी, व उन्हे परिवार से अलग-थलग कर गलत दवा देकर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। पूरी मीडिया और सोशल मीडिया ने रिया का जीना दुश्वार कर दिया है।

रिया को काला जादू करने वाली बंगालन कहा गया, कहा गया वो नागिन है जिसने सुशांत को डस लिया है। यहां तक कि बिहार के एक मंत्री ने रिया को विषकन्या तक कह दिया। जब बड़े और सम्मानित पदों पर बैठे लोग ऐसी गैर-जिम्मेदाराना हरकत करेंगे तो आम जनता से क्या उम्मीद कर सकते हैं।

अगर मीडिया की बात करें तो मीडिया ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी सुशांत के केस का मीडिया ट्रायल करने की। रिया को मीडिया में आरोपी नहीं दोषी की तरह पेश किया गया। काले जादू की बात में मीडिया भी पीछे नहीं था। बड़े-बड़े एंकरों ने प्राइम टाइम में रिया और उनके काले जादू उनकी बेवफाई पर डिबेट करवाई। सोचिए एक मीडियाकर्मी के तौर पर किसी मामले में बिना जांच के नतीजों के किसी को हत्यारा बना देना और उसे प्रताड़ित करना कितना शर्मनाक, अनैतिक  और मीडिया सिद्धांतो के खिलाफ है।

दरअसल रिया का बंगाली होना भी एक बड़ी वजह है कि उन्हें इस तरह प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि भारत में हर राज्य से जुड़े कुछ पूर्वाग्रह होते हैं। उसी तरह बंगाल और बंगालियों से जुड़ा एक पूर्वाग्रह है कि यह लोग काला जादू करते हैं इनसे दूर रहना चाहिए। सुशांत के परिवार को रिया पर शक है जिसने अपना बेटा इतनी कम उम्र में खो दिया है और उनके बेटे को न्याय न मिल रहा हो उनका ऐसा कदम उठाना स्वाभाविक जिस पर भी उन्हें शक है उसके खिलाफ जांच होनी ही चाहिए। लेकिन जांच से पहले किसी को मानसिक प्रताड़ना देना यह ठीक नहीं है।

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हम यहां यह कतई नहीं कह रहे कि रिया बेगुनहा हैं। यह तय करने का न तो हमारे पास अधिकार है और न ही यह हमारा काम है लेकिन क्या सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी को ट्रोल करना उसे मानसिक तौर पर परेशान करना कितना सही है। अगर रिया आरोपी हैं तो उन्हें सजा जरुर मिलनी चाहिए और यह काम जांच ऐंजसियों का है और वह बखूबी अपना काम जानती हैं। लेकिन अगर जांच के बाद रिया निर्दोष साबित हुईं तो इस मैंटल ट्रॉमा की जिम्मेदारी कौन लेगा जिससे रिया गुजर रही हैं अगर रिया मानसिक परेशानी के चलते खुद को नुकसान पहुंचा लिया तो उसकी सजा किसे और कितने लोगों को मिलेगी ?

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