सीखने के लिए ये जीवन बहुत छोटा है, नई बात से वाकिफ़ कराने वाला हर व्यक्ति शिक्षक है

धरती पर ज्ञान इतना है कि मनुष्य का एक जीवन उसके बारे में जानने के लिए ही काफी बौना है। ये भी करने और वो भी करने को लगातार मन करता रहता है। लेकिन जो कर रहे हैं उससे दूरी न बन जाए। इसलिए पैर पीछे खींचने पड़ते हैं।

Updated On: Sep 5, 2020 13:31 IST

Dastak Web Team

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अजय चौधरी

कभी सोचता था ग्रेजुएशन के बाद से शिक्षा लेने से पीछा छूट जाएगा, पर अब हर रोज सीखना होता है और आखिर तक सीखते रहना चाहता हूं। धरती पर ज्ञान इतना है कि मनुष्य का एक जीवन उसके बारे में जानने के लिए ही काफी बौना है। ये भी करने और वो भी करने को लगातार मन करता रहता है। लेकिन जो कर रहे हैं उससे दूरी न बन जाए। इसलिए पैर पीछे खींचने पड़ते हैं। एक स्वर्गीय कवि और गीतकार ने अपने घर में बिजली का कनेक्शन ही नहीं लिया था कि मैं इसके बिल भरने में और अन्य समस्याओं में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता। लेकिन परिवार और अन्य समस्याओं का सामाधान करने में ही हम उलझे रह जाते हैं।

हम भारतीय अपनी शिक्षा प्रणाली में बहुत कुछ खोते हैं और काफी समय बर्बाद करते हैं। इसमें बदलाव हो तो हम अपने एक विषय में इतने समय में निपुण हो सकते हैं। भारत में आदमी नौकरी या अपना काम करते करते वो ज्ञान लेता है जो उसे कॉलेज में ले लेना चाहिए था। फिर कोरा कागज कहता है कि न सैलरी मिल रही है और न मेरे काम की सरहाना हो रही है मेरा तो बस दोहन हो रहा है।

मैं हर उस व्यक्ति में शिक्षक का रुप देखता हूं जो नई बात से वाकिफ़ कराता है। जिसकी लेखनी, सोच और शब्द  मुझे प्रभावित करते हैं। मुझे अयोध्या के बारे में जितना ज्ञान एक आम दुकानदार ने दिया उतना मंहत भी नहीं दे पाए। जो विचार एक आम व्यक्ति ने भरोसे में लेने के बाद मुझे दिए। वह बातों-बातों में ही बड़ों-बड़ों की पोल खोल देते हैं।ये ऐसे सभी लोग भी तो हमारे शिक्षक ही हैं, जो हर रोज हमें जीने के नए तरीके से वाकीफ कराते हैं। मजबूरियाें के साथ उनके हौंसले हमें हिम्मत देते हैं, और हमें जीने की नई राह दिखाते हैं।

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